भूकंप पर निबंध (प्राकृतिक आपदा)

[प्राकृतिक आपदा] भूकंप (Earthquake) पर छोटे व बड़े निबंध [Long & Short essay Writing on Earthquake in Hindi]

[प्राकृतिक आपदा] भूकंप (Earthquake)

पृथ्वी की सतह के हिलने और कांपने को भूकंप के रूप में जाना जाता है। भूकंप को सबसे खतरनाक प्राकृतिक आपदाओं में से एक माना जाता है क्योंकि वे जीवन और संपत्ति को बहुत नुकसान पहुंचाते हैं। भूकम पे निबंध छोटे बच्चो और कॉलेज छात्रों के लिए निबंध प्रस्तुत किया गया है।

#1. [100-150 Words] भूकंप -भूचाल (Bhukamp)

धरती के अचानक हिलने की घटना भूकंप कहलाती है। जब पृथ्वी के आंतरिक गर्म पदार्थों के कारण हलचल उत्पन्न होती है, तो भूकंप की स्थिति उत्पन्न होती है। कभी भूकंप हल्की तो कभी भारी तीव्रता का होता है। कम तीव्रता वाला भूकंप आने पर क्षेत्र-विशेष में धरती केवल हिलती महसूस होती है लेकिन इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता। अधिक तीव्रता वाला भूकंप कभी-कभी भारी क्षति पहुँचाता है। कच्चे और कमज़ोर मकान ढह जाते हैं, चल-अचल संपत्ति का भारी नुकसान होता है। सैंकड़ों मनुष्य मकान के मलबे में दबकर मर जाते हैं। हज़ारों घायल हो जाते हैं। लोग बेघर-बार होकर अस्थायी निवास में रहने के लिए विवश होते हैं। परिस्थितियों के सामान्य बनाने में कई महीने या कई वर्ष लग जाते हैं। भूकंप को रोका नहीं जा सकता परंतु सावधानियाँ बरतने से इससे होने वाली क्षति ज़रूर कम की जा सकती है। इससे बचाव के लिए भूकंपरोधी भवनों का निर्माण करना चाहिए। भूकंप आने पर घबराना नहीं चाहिए बल्कि आवश्यक सावधानियाँ बरतनी चाहिए। भूकंप एक प्राकृतिक आपदा है, इसका मिल-जुलकर मुकाबला करना चाहिए।

#2. [400-500 Words] भूकंप पर निबंध-essay on earthquake in Hindi

भूमिका : भूकंप पृथ्वी का अपनी धुरी से हिलकर कम्पन करने की स्थिति को भूकम्प या भूचाल कहा जाता है। कभी-कभी तो यह स्थिति बहुत भयावह हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप पृथ्वी के ऊपर स्थित जड़-चेतन हर प्राणी और पदार्थ का या तो विनाश हो जाता है या फिर वह सर्वनाश की-सी स्थिति में पहुंच जाता है। जापान के विषय में तो प्रायः सुना जाता है कि वहां तो अक्सर भूकम्प आकर विनाशलीला प्रस्तुत करते ही रहते हैं। इस कारण लोग वहां लकड़ियों के बने घरों में रहते हैं। इसी प्रकार का एक भयानक भूकम्प बहुत वर्षों पहले अविभाजित भारत के कोटा नामक स्थान पर आया था। उसने शहर के साथ-साथ हजारों घर-परिवारों का नाम तक भी बाकी नहीं रहने दिया था।

अभी कुछ वर्षों पहले गढ़वाल और महाराष्ट्र के कुछ भागों को भूकम्प के दिल दहला देने वाले हादसों का शिकार होना पड़ा था। प्रकृति की यह कैसी लीला है कि वह मानव-शिशुओं के घर-घरौंदों को तथा स्वयं उनको भी कच्ची मिट्टी के खिलौनों की तरह तोड़-मरोड़कर रख देती है। पहले यह भूकम्प गढ़वाल के पहाड़ी इलाकों में आया था, जहां इसने बहुत नुकसान पहुंचाया था। थोड़े दिन पश्चात् महाराष्ट्र के एक भाग में फिर एक भूकम्प आया जिसने वहां सब कुछ मटियामेट कर दिया था। महाराष्ट्र में धरती के जिस भाग पर भूकम्प के राक्षस ने अपने पैर फैला दिए थे वहाँ तो आस-पास के मकानों के खण्डहर बन गए थे। उन मकानों में फंसे लोग कुछ तो काल के असमय ग्रास बन गए थे, कुछ लंगड़े-लूले बन चुके थे। एक दिन बाद समाचार में पढ़ा कि वहां सरकार और गैर-सरकारी स्वयं-सेवी संस्थाओं के स्वयंसेवक दोनों राहत कार्यों में जुटे हुए थे। ये संस्थाएं अपने साधनों के अनुरूप सहृदयता का व्यवहार करती हुई पीड़ितों को वास्तविक राहत पहुंचाने का प्रयास कर रही थीं।

भूकम्प कितना भयानक था यह दूरदर्शन में वहां के दृश्य देखकर अन्दाजा हो गया था। जिन भागों पर भूकम्प का प्रकोप था वहां सब कुछ समाप्त हो चुका था। हल जोतने वाले किसानों के पशु तक नहीं बचे थे। दुधारू पशुओं का अन्त हो चुका था। सैकड़ों लोग मकानों के ढहने और धरती के फटने से मृत्यु को प्राप्त हो गए थे। इस प्रकार हंसता-खेलता संसार वीरान होकर रह जाता है। सब ओर गहरा शून्य तथा मौत का-सा सन्नाटा छा जाता है। कभी-कभी मैं सोचता हूं कि जापान के लोग कैसे रहते होंगे जहां इस प्रकार के भयावह भूकम्प आए दिन आते रहते हैं।

26 जनवरी, 2001 को गुजरात सहित पूरे भारत ने भूकंप का कहर देखा। भुज सहित संपूर्ण गुजरात में भारी जान-माल का नुकसान हुआ। 8 अक्टूबर, 2005 को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और उससे सटे भारतीय कश्मीर में दिल दहला देने वाला जो भूकंप आया उसमें जहाँ एक लाख से अधिक लोंग काल के गाल में समा गए, वहीं लाखों लोग घायल हुए। अरबों रुपए की संपत्ति की हानि हुई।

भूकंप वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी तक ऐसा कोई उपकरण-यंत्र विकसित नहीं हुआ है, जिससे यह बात पता चल सके कि अमुक-अमुक क्षेत्रों में भूकंप आने वाला है। भूकंप के आते समय ‘रिक्टर स्केल’ पर सिर्फ उसकी क्षमता का ही माप लिया जा सकता है। जापान, पेरू व अमेरिका के कुछ राज्यों में जहां भूकंप के झटके अकसर महसूस किए जाते हैं, वहां के वैज्ञानिकों ने भूकंपरोधी मकानों (Earthquake Resistance) का निर्माण किया है। भारत के भूकम्प प्रमाणित क्षेत्रों में भी ‘भूकंपरोधी’ मकानों के निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने के लिए सरकार को कारगर नीति बनानी चाहिए।

#3. [600-700 Words] Bhukamp par nibandh भूकंप निबंध हिंदी में

भूमिका : प्रकृती उस ईशवर की रचना होने के कारण अजय है। मनुष्य आदि काल से प्रकृति की शक्तियों के साथ संघर्ष करता रहा है। उसने अपनी बुद्धि साहस एवं शक्ति के बल पर प्रकृति के अनेक रहस्य का उद्घाटन करने में सफलता प्राप्त की है लेकिन इस प्रकृति की शक्तियों पर पूर्ण अधिकार करने की सामर्थ्य मनुष्य में नहीं है। प्रकृति अनेक रूपो में हमारे सामने आती है। ये कभी अपना कोमल और सुखदायी रूप दिखाती है। तो कभी ऐसा कठोर रूप धारण करती है कि मनुष्य इसके सामने विवश और असहाय हो जाता है। आंधी तूफान, अकाल, अनावृष्टि अतिवृष्टि तथा भूकम्प ऐसे ही प्रकोप है।

भूकम्प क्या है: भूमि के हिलने को भूचाल, भूकंप की संज्ञा दी जाती है। धरती का कोई भी अंग ऐसा नहीं बचा जहां कभी ना कभी भूकंप के झटके ना आए हो, भूकंप के हल्के झटके से तो विशेष हानि नहीं होती है। लेकिन जब कभी जोर के झटके आते हैं तो वे प्रलय कारी दृश्य उपस्थित कर देते हैं। कामायनी के महाकाव्य के रचयिता श्री जयशंकर प्रसाद में प्रकृति का प्रकोप का वर्णन करते हुए लिखा है।

हा – हा – कार हुआ क्रंदनमय कठिन कुलिश होते थे चूर हुए दिगंत वाघेर, भीषण रव बार-बार होता था क्रूर।।

भूकंप का कारण: भूकंप क्यों आते हैं यह एक ऐसा रहस्य है जिसका उद्घाटन आज तक नहीं हो सका वैज्ञानिकों ने प्रकृति को मनुष्य के अनुकूल बनाने का प्रयत्न किया है । वह गर्मी तथा सर्दी में स्वयं को बचाने के लिए वातावरण को अपने अनुकूल बना सकता है। लेकिन भूकंप तथा बाढ़ आदि ऐसे देवी प्रकोप है जिनका समाधान मनुष्य जाति सैकड़ों वर्षों के कठोर प्रयोत्नो के बावजूद भी नहीं कर पाई है।

भूकंप के कारण के विभिन्न मत: भूकम्प को विषय में लोगों के भिन्न-भिन्न मत है, भुगर्भ शास्त्रियों का मत है कि धरती के भीतर तरल पदार्थ है, जब अंदर की गर्मी के कारण तीव्रता से फैलने लगते हैं तो पृथ्वी हिल जाती है। कभी-कभी ज्वालामुखी का फटना भी भूकम्प का कारण बन जाता है। भारत एक धर्म प्रधान देश है, यहां के लोगों का मत है कि जब पृथ्वी के किसी भाग पर अत्याचार और अनाचार बढ़ जाते हैं तो उस भाग में देवी प्रकोप के कारण भूकंप आते है। देहातो में तो यह कथा भी प्रचलित है कि शेषनाग ने पृथ्वी को अपने सिर पर धारण कर रखा है। उसके सात सिर है जब एक सिर पृथ्वी के बोझ के कारण थक जाता है। तो उसे दूसरे सिर पर बदलना है उसकी इस क्रिया से पृथ्वी हिल जाती है। और भूकंप आ जाता है, अर्थशास्त्रियों का तर्क है कि जब पृथ्वी पर जनसंख्या जरूरत से अधिक बढ़ जाती है तब उसे संतुलित करने के लिए भूकम्प उत्पन्न करती हैं।

भूकंप से हानि: भूकंप का कारण कोई भी क्यों ना हो, पर इतना निश्चित है कि यह एक दैवी प्रकोप है जो अधिक विनाश का कारण बनता है यह जान लेवा ही नहीं बनता बल्कि मनुष्य की शताब्दीयो की मेहनत को भी नष्ट कर देता है। बिहार में बड़े विनाशकारी भूकंप देखे हैं हजारों लोग मौत के मुंह में चले गए भूमि में दरारें पड़ गई जिनमें जीवित प्राणी समा गए पृथ्वी के गर्भ से कई प्रकार की विषैली गैस उत्पन्न हूंई जिनमें प्राणियों का दम घुट गया। भूकंप के कारण जो लोग धरती में समा जाते हैं उनके मृत शरीरों को बाहर निकालने के लिए धरती की खुदाई करनी पड़ती है। यातायात के साधन नष्ट हो जाते हैं बड़े-बड़े भवन धराशाई हो जाते हैं लोग बेघर हो जाते हैं धनवान निर्धन बन जाते हैं और निर्धनों को जीने के लाले पड़ जाते हैं।

भूकंप का उल्लेख: सन 1935 में क्वेटा ने भूकंप का प्रलयकारी नृत्य देखा था। भूकंप के तेज झटकों के कारण देखते ही देखते एक सुंदर नगर नष्ट हो गया हजारों स्त्री पुरुष जो रात की सुखद नींद का आनंद ले रहे थे क्षण भर में मौत का ग्रास बन गए। मकान, सड़के ओर व्रक्ष आदि सब नष्ट हो गए सब कुछ बहुत दयनीय हो गया। बहुत से लोग अपंग हो गए। किसी का हाथ टूट गया तो किसी की टॉन्ग, कोई अँधा हो गया तो कोई बहरा। अनेक स्त्रियां विधवा हो गई। बच्चे अनाथ हो गए। भारत देश के गुजरात राज्य में सन 2001 का भूकंप ऐसा रहा कि जिससे हुई बर्बादी अभी तक किसी भी भूकम्प से हुई बर्बादी से अधिक है। आज भी जब उस भूकम्प की करुण कहानी सुनते है।तो ह्रदय कांप उठता है।

भूकंप क्यों आते हैं ? इस संबंध में भिन्न-भिन्न मत प्रचलित हैं। भूगर्भशास्त्रियों की राय है कि पृथ्वी के भीतर की तहों में सभी धातुएँ और पदार्थ आदि तरल रूप में बह रहे हैं। जब वे भीतर की गरमी के कारण अधिक तेजी से बहते और फैलते हैं तो धरती काँप उठती है। कभी-कभी ज्वालामुखी पर्वतों के फटने से भी भूकंप आ जाते हैं। एक अन्य मत यह भी प्रचलित है कि पृथ्वी के भीतर मिट्टी की तहों के बैठने (धसकने) से भी धरती हिल उठती है।

जापान आदि कुछ ऐसे देश है जहां भूकंप की संभावना अधिक रहती है यहां पर मकान पत्थर चुने तथा ईट के ना होकर लकड़ी तथा गत्ते के बनाए जाते हैं। ये साधन भूकम्प के प्रभाव को कम कर सकते हैं पर उसे रोक नहीं सकते है। भूकंप जब भी आता है जान और माल की हानि अवश्य होती है। टर्की में भी एक भीषण भूकंप आया था जिसके परिणाम स्वरूप हजारों मनुष्य दबकर मर गए थे भूकंप के हल्के झटके भी कम भयंकर नही होते उससे भवनों को क्षति पहुंचती है।

उपसंहार : आज का युग विज्ञान का युग कहलाता है। पर विज्ञान देवी प्रकोप के सामने विवश है। भूकम्प के मनुष्य कारण क्षण भर में ही प्रलय का दृश्य उपस्थित हो जाता है। ईश्वर की इच्छा के आगे सब विवश है। मनुष्य को कभी भी अपनी शक्ति और बुद्धि का घमंड नहीं करना चाहिए उसे हमेशा प्रकृति तथा ईश्वर की शक्ति के आगे नतमस्तक रहना चाहिए। ईश्वर की कृपा ही मानव जाति को ऐसे प्रकोप से बचा सकती है।

#4. [800-1000 Words Long essay] प्राकृतिक आपदा भूकंप पर निबंध

प्रस्तावना : मनुष्य अपने स्वार्थ सिद्धि और तरक्की के कारण पर्यावरण को बेहद नुकसान पहुंचा रहा है। पर्यावरण का संतुलन बिगड़ रहा है। इसके कारण कई प्राकृतिक आपदाओं को इसने जन्म दिया है। भूकंप एक भयंकर प्राकृतिक आपदा है। यह एक भीषण संकट है। भूकंप जैसे ही आता है , यह जीव जंतु , मनुष्य सभी की जान ले लेता है। पेड़ पौधे नष्ट हो जाते है। बड़ी बड़ी इमारतें कुछ ही मिनटों में ताश के पत्तों की तरह ढह जाती है। भूमि पर दरार पड़ जाती है। अचानक धरती पर तीव्र गति से कम्पन होती है कि एक ही झटके में सब कुछ नष्ट हो जाता है। कई परिवार भूकंप की इस भयावह आपदा के शिकार हो जाते है। हर तरफ त्र्याही त्र्याही मच जाती है। भूकंप दो अक्षरों -भू + कम्प से बना है। भू मतलब धरती और कम्प का अर्थ है कम्पन। इस प्रकार भूमि यानी धरती पर अचानक आये कम्पन को भूकंप कहते है।

लोग बेघर हो जाते है और इस विनाशकारी आपदा की वजह से घायल हो जाते है। भूकंप के समक्ष मनुष्य की हालत दयनीय और असहाय हो जाती है। अपने चारो तरफ वह विनाश देखने को बेबस हो जाता है। भूकंप , बड़े उन्नत शहरों को खंडहरों में बदल कर रख देता है। मनुष्य ने हर क्षेत्र में प्रगति कर ली मगर भूकंप पर विजय पाने में असफल रहा है। ज़्यादातर भूंकम्प ज्वालामुखी विस्फोटो से आते है। जब ज्वालामुखी विस्फोट होता है , धरती में कम्पन पैदा हो जाता है। भूंकम्प आने पर चट्टानें टूट जाती है। जहाँ पर यह भूकंप आता है , वहां पर बसे गाँव और शहर नष्ट हो जाते है। जान माल की प्रचुर हानि होती है। कई बार दरारे इतनी गहरी पड़ती है कि लोग जिन्दा दफ़न हो जाते है। संचार और यातायात के सभी साधन भूकंप की वजह से नष्ट हो जाते है।

भूकंप पीड़ित जगहों पर कई वर्षो तक खुशहाली लौटती नहीं है। जीवन सामान्य होने में वक़्त लगता है। धरती को कृषि योग्य बनाने के लिए सैंकड़ो सालों से की गयी परिश्रम एक पल में नष्ट हो जाती है। भूकंप की वजह से सागर में भयानक लहरें उठती है जो वहां के क्षेत्रों में बसे लोगो पर कहर बरसाती है। भूकंप के समय समुद्र में तैर रही जहाजों का बचना नामुमकिन हो जाता है।

भारत में गुजरात के भुज में 7.7 तीव्रता से विनाशकारी भूकंप आया था। इस भूकंप में तीस हज़ार से ज़्यादा लोगो की जान चली गयी थी।

चार परतो से मिलकर धरती का निर्माण होता है। क्रस्टल , मेन्टल , इनर कोर , आउटर कोर इन चार परतो के नाम है। जब घरती के अंदर यह टेकटोनिक प्लेट हिलती है भूंकम्प आता है। धरती पर कभी कभार इतना अधिक दबाव पड़ता है कि पहाड़ खिसकने लगते है। टेकटोनिक प्लेट की तरह पहाड़ो , महासागरों की भी विभिन्न प्लेट होती है। भूकंप तब भी आ सकता , जब ऐसी प्लेट्स एक दूसरे के संग टकराती है।

भूकंप आने के कुछ कारण , मनुष्य का परमाणु परीक्षण , अनियमित प्रदूषण खदानों में विस्फोट , गहरे कुएं से तेल प्राप्त करना , जगह -जगह पर बाँध का निर्माण करवाना है । भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल में मापी जाती है। भूकंप को जिस उपकरण से मापा जाता है , उसे सिस्मोमीटर कहा जाता है। अगर दो से तीन तक की रिक्टर स्केल की भूकंप आती है ,तो यह भूकंप इतनी तीव्र नहीं होती है। अगर भूकंप की तीव्रता सात रिक्टर या उससे ज़्यादा होती है , तो भीषण विनाश ले आती है। ऐसे भूकंप में जान माल का बहुत नुकसान होता है।

जिस जगह में जनसंख्या का घनत्व अधिक होती है , वहां भूकंप से भयानक हानि होती है। शहरों में बड़ी इमारते होती है ,वो ढह जाती है जिसमे कई लोग दब कर मर जाते है। जब भूकंप आता है , तो नदियों और समुन्दरो में लहरें बढ़ जाती है। इससे बाढ़ का भय बढ़ जाता है।

अगर अतिरिक्त कम्पन होता है , धरती का बुरी तरीके से फटना शुरू हो जाता है। भूकंप आने पर चारो तरफ तनाव और भय का माहोल उतपन्न हो जाता है। मनुष्य को ऐसे घरो का निर्माण करना चाहिए ,जो भूकंप की चपेट को झेल सके। भूकंप रोधी घर होने चाहिए। जैसी ही लोगो को भूकंप के झटके महसूस होते है , उन्हें अपने मकान से निकलकर , खुले स्थान पर जाना चाहिए। अगर देर हो रही है , तो किसी सख्त फर्नीचर के नीचे छिप जाए । एक बात का ध्यान रखे , भूकंप के समय लिफ्ट का उपयोग बिलकुल ना करे। बिजली की मैन स्विच बंद कर दे। भूकंप की वजह से बड़े बड़े घरो और पाइपलाइनो में भयंकर आग लग सकती है। इससे और अधिक लोगो की जान जा सकती है। कई तरह के बिजली उपकरणों के कारण और अधिक भयंकर हादसा हो सकता है। इसलिए सावधानी बरतनी ज़रूरी है। समुद्र में जब भूकंप आता है ,तो वहां ऊँची लहरों का निर्माण होता है। यह सब विनाश भूकंप की ही देन है।

भूकंप आने से पूर्व मनुष्य को कोई चेतावनी नहीं मिलती है। लोगो को भूकंप के बारे में पहले से कुछ जानकारी नहीं मिलती है। कभी भूकंप की गति कम होती है , लोग इसे भूल जाते है। जब भूकंप अपने चरम सीमा पर होता है , तो गंभीर घाव दे जाता है। भूकंप अचानक दस्तक देती है और सब कुछ तहस नहस कर देती है।

यह सबसे घातक प्राकृतिक आपदा है। इससे लोगो की जिंदगी और संपत्ति सब लूट जाती है। भूकंप की उत्पत्ति जहां होती है , उसे भूकंप केंद्र कहा जाता है। भूकंप जैसे महाविनाश को रोकना असंभव है। मनुष्य को इसके प्रभाव को कैसे कम किया जाए , इस पर विचार करना चाहिए। मनुष्य भूकंप के कष्टों को कम ज़रूर कर सकता है। सामाजिक संस्थाएं ग्रसित जगहों में जाकर पीड़ित लोगो की मदद करती है। सरकार पीड़ित लोगो के पुनः स्थापना के लिए सरकारी अनुदान देती है। राहत कोष जैसी सुविधाएं प्रदान की जाती है। मनुष्यो के औद्योगीकरण और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में तीव्र गति की उन्नति ने इन भयानक प्राकृतिक आपदाओं को जन्म दिया है। मनुष्य को इस पर नियंत्रण करना बहुत ज़रूरी है।

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1 thought on “भूकंप पर निबंध (प्राकृतिक आपदा)”

Well l think u could have posted 200-300 words limitation too. Coz there situation in which we don’t need much words and of course least words.So for that situation 200-300 words is perfect. I just wanted to make u know about it……..

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Earthquake Explained: क्या होता है भूकंप, कैसे आता है... क्या होती है इसकी वजह?

नेपाल में भूकंप आया. भारत और चीन भी हिल गए. इस साल भारत में 948 भूकंप आए. लेकिन क्या आपको पता है कि भूकंप कैसे आता है इसके पीछे की क्या वजह है ये कब आता है, क्यों आता है. ये है क्या बला इससे क्या नुकसान होता है. ये कितनी ताकतवर हो सकता है..

भूकंप की वजह से ही आपकी धरती का ये स्वरूप बना है, जिस पर हम आज रह रहे हैं. (फोटोः गेटी)

ऋचीक मिश्रा

  • 09 नवंबर 2022,
  • (अपडेटेड 09 नवंबर 2022, 8:37 AM IST)

assignment on earthquake in hindi

हमारी पृथ्वी प्रमुख तौर पर चार परतों से बनी है. यानी इनर कोर (Inner Core), आउटर कोर (Outer Core), मैंटल (Mantle) और क्रस्ट (Crust). क्रस्ट सबसे ऊपरी परत होती है. इसके बाद होता है मैंटल. ये दोनों मिलकर बनाते हैं लीथोस्फेयर (Lithosphere). लीथोस्फेयर की मोटाई 50 किलोमीटर है. जो अलग-अलग परतों वाली प्लेटों से मिलकर बनी है. जिसे टेक्टोनिक प्लेट्स (Tectonic Plates) कहते हैं. 

धरती के अंदर सात टेक्टोनिक प्लेट्स हैं. ये प्लेट्स लगातार घूमती रहती हैं. जब ये प्लेट आपस में टकराती हैं. रगड़ती हैं. एकदूसरे के ऊपर चढ़ती या उनसे दूर जाती हैं, तब जमीन हिलने लगती है. इसे ही भूकंप कहते हैं. भूकंप को नापने के लिए रिक्टर पैमाने का इस्तेमाल करते हैं. जिसे रिक्टर मैग्नीट्यूड स्केल कहते हैं. 

रिक्टर मैग्नीट्यूड स्केल 1 से 9 तक होती है. भूकंप की तीव्रता को उसके केंद्र यानी एपीसेंटर से नापा जाता है. यानी उस केंद्र से निकलने वाली ऊर्जा को इसी स्केल पर मापा जाता है. 1 यानी कम तीव्रता की ऊर्जा निकल रही है. 9 यानी सबसे ज्यादा. बेहद भयावह और तबाही वाली लहर. ये दूर जाते-जाते कमजोर होती जाती हैं. अगर रिक्टर पैमाने पर तीव्रता 7 दिखती है तो उसके आसपास के 40 किलोमीटर के दायरे में तेज झटका होता है. 

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3800 साल पहले आया था दुनिया का सबसे भयावह भूकंप

वैज्ञानिकों को मानव इतिहास के अब तक के सबसे बड़े भूकंप के बारे में पता चला है. चिली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डिएगो सालाजार ने इस बारे में रिसर्च किया. इस भयानक भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 9.5 थी. इस भूकंप से 8000 किलोमीटर तक सुनामी आई थी. उस समय धरती पर रह रहे इंसानों 1000 साल तक आसपास के समुद्र तटों को छोड़ना पड़ा था. यह भूकंप 3800 साल पहले आया था. जहां ये आया था, उसे अब उत्तरी चिली कहा जाता है. एक टेक्टोनिक प्लेट के टूटने की वजह से इस इलाके की तटरेखा (Coastline) ऊपर उठ गई थी. भूकंप की वजह से सुनामी की 66 फीट लंबी लहरें उठी थीं. 

आधुनिक इतिहास का सबसे बड़ा भूकंप वाल्डिविया में आया था

अब तक, रिकॉर्ड किया गया सबसे बड़ा भूकंप 1960 में आया वाल्डिविया भूकंप (Valdivia earthquake) था. यह  9.4 से 9.6 के बीच की तीव्रता का था. इसने दक्षिणी चिली को हिलाकर रख दिया था. इस भूकंप में 6,000 लोग मारे गए थे. इसकी वजह से प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में बार-बार सुनामी आई. वाल्डिविया भूकंप जिस टेक्टोनिक प्लेट के टूटने से आया, उसकी लंबाई 800 किमी थी. 

लगातार चीन की तरफ बढ़ रही है भारतीय टेक्टोनिक प्लेट

इंडियन टेक्टोनिक प्लेट हिमालय से लेकर अंटार्कटिक तक फैली है. यह पाकिस्तान बार्डर को सिर्फ छूती है. भूगोल के हिसाब से यह हिमालय के दक्षिण में है. जबकि यूरेशियन प्लेट हिमालय के उत्तर में है. इंडियन प्लेट उत्तर-पूर्व दिशा में यूरेशियन प्लेट की तरफ यानी चीन की तरफ लगातार बढ़ रही है. अगर ये प्लेट टकराती हैं तो भूकंप का केंद्र भारत में होगा. जिससे बड़ी तबाही होगी. 

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भूकंप चार प्रकार के होते हैं... जानिए कौन-कौन से

भूकंपों के तीन प्रकार होते हैं. पहला इंड्यूस्ड अर्थक्वेक (Induced Earthquake) यानी ऐसे भूकंप जो इंसानी गतिविधियों की वजह से पैदा होते हैं. जैसे सुरंगों को खोदना, किसी जलस्रोत को भरना या फिर किसी तरह के बड़े भौगोलिक या जियोथर्मल प्रोजेक्ट्स को बनाना. बांधों के निर्माण की वजह से भी भूकंप आते हैं. 

दूसरा होता है वॉल्कैनिक अर्थक्वेक (Volcanic Earthquake) यानी वो भूकंप जो किसी ज्वालामुखी के फटने से पहले, फटते समय या फटने के बाद आते हैं. ये भूकंप गर्म लावा के निकलने और सतह के नीचे उनके बहने की वजह से आते हैं. तीसरा होता है कोलैप्स अर्थक्वेक (Collapse Earthquake) यानी छोटे भूकंप के झटके जो जमीन के अंदर मौजूद गुफाओं और सुरंगों के टूटने से बनते हैं. जमीन के अंदर होने वाले छोटे विस्फोटों की वजह से भी ये आते हैं.

चौथा है एक्सप्लोसन अर्थक्वेक (Explosion Earthquake) इस तरह के भूकंप के झटके किसी परमाणु विस्फोट या रासायनिक विस्फोट की वजह से पैदा होते हैं. 

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भूकंपों के आने से क्या फायदा होता है? 

भूकंप से धरती की अंदरूनी संरचना को समझने में वैज्ञानिकों को मदद मिलती है. भूकंपों की वजह से ही ऊंचाई वाले इलाकों का निर्माण होता है. इससे उस इलाके की जलवायु पर पॉजिटिव इफेक्ट पड़ता है. जैसे पर्वत, पठार, घाटियां. इन स्थानों पर वनों का निर्माण होता है. जीवन पनपता है. मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ती है. भूकंपों की वजह से ही हमारी दुनिया का ये स्वरूप हमें देखने को मिल रहा है. हालांकि इनकी वजह से जानमाल का नुकसान बहुत होता है. 

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भूंकप पर निबंध – Essay on Earthquake in Hindi

Essay on Earthquake

भूकंप एक ऐसी प्राकृतिक आपदा है, जो कि जीव-जन्तु, जलवायु, पेड़-पौधे, वनस्पति, पर्यावरण समेत समस्त मानव जीवन के लिए किसी बड़े संकट से कम नहीं है। भूकंप, जब भी आता है, धरती पर इतनी तेज कंपन होता है कि पल-भर में ही सब-कुछ तहस-नहस हो जाता है और तमाम मानव जिंदगियों एक झटके में बर्बाद हो जाती हैं।

अक्सर स्कूल के बच्चों को भूंकप पर निबंध लिखने के लिए कहा जाता है, इसी दिशा में हम अपने इस पोस्ट में आपको भूकंप जैसी विनाशकारी आपदा पर निबंध उपलब्ध करवा रहे हैं, जिसमें भूकंप से संबंधित सभी मुख्य तथ्य शामिल किए गए हैं, इस निबंध को आप अपनी जरुरत के मुताबिक इस्तेमाल कर सकते हैं –

Essay on Earthquake in Hindi

भूकंप, जैसी अत्यंत विध्वंशकारी और भयावह आपदा जब भी आती है, धरती पर इतनी तेज कंपन हो उठता है कि पल भर में ही सब-कुछ नष्ट हो जाता है। भूकंप आने पर न सिर्फ सैकड़ों जिंदगियों का पल भर में विनाश हो जाता है, बल्कि करोड़ों-अरबों रुपए की संपत्ति भी एक ही झटके में मलबे का ढेर बन जाती है।

तेज भूकंप आने पर न जाने कितनी इमारतें ढह जाती हैं, नदियों, जलाशयों में उफान आ जाता हैं, धरती फट जाती है और सुनामी का खतरा बढ़ जाता है, भूकंप को तत्काल प्रभाव से नहीं रोका जा सकता है।

भूकंप क्या है – What is the Earthquake

भूकंप शब्द – दो अक्षरों से मिलकर बना है- भू+कंप अर्थात, भू का अर्थ है भूमि, और कंप का मतलब कंपन से है तो इस तरह भूमि पर कंपन को ही भूकंप कहते हैं।

वहीं अगर भूकंप को परिभाषित किया जाए तो – भूकंप एक अत्यंत विध्वंशकारी प्राकृतिक आपदाओं में से है, जिसमें अचानक से धरती सतह पर तेजी से कंपन होना लगता है, अर्थात धरती बुरी तरह हिलने-डुलने लगती है।

वहीं जब भूकंप की तीव्रता की गति अत्यंत तेज होती है, तो यह उस भयावह स्थिति को उत्पन्न करता है, जिसमें धरती फटने लगती हैं, नदियों, जलाशयों में तेजी से उफान आता है, जिससे भूस्खलन और सुनामी जैसे संकट का खतरा पैदा हो जाता है, और इससे बड़े स्तर पर जान-माल की हानि होती है, और इसके तत्काल प्रभाव पर काबू नहीं पाया जा सकता है।

भूकंप आने के कारण – Causes of Earthquake

प्राकृतिक और मानव निर्मित दोनों कारणों से भूकंप आ सकता है-

भूकंप आने के प्राकृतिक कारण – Natural Causes of Earthquake

क्रस्टल, मेनटल, इनर कोर और आउट कोर इन चार परतों से मिलकर धरती बनी हैं, इन परतों को टेक्टोनिक प्लेट्स कहा जाता है, वहीं जब ये प्लेट्स अपने स्थान से खिसकती हैं अर्थात हिलती-डुलती हैं तो भूकंप की स्थिति पैदा हो जाती है। इसके साथ ही जब धरती की निचली सतह में तरंगें उत्पन्न होती हैं, तो भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा जन्म लेती हैं

धरती का तापमान बढ़ने से ज्वालामुखी फटते हैं, जिसके कारण भूकंप जैसी विनाशकारी आपदा आती है।

धरती के अंदर की चट्टानों के खिसकने की वजह से भी भूकंप आते हैं, इसलिए धऱती पर दवाब होने की वजह से पहाड़ वाले स्थान पर भूकंप ज्यादा आते हैं।

भूकंप पर वैज्ञानिकों की आधुनिक शोध के तहत प्लेट टेक्टोनिस्क भी भूकंप का कारण हैं, इसके तहत जब पहाड़ों, महासागरों, मरुभूमियों और महाद्धीपों की अलग-अलग प्लेटें होती हैं, जो कि लगातार खिसकती रहती हैं, वहीं ऐसी प्लेटों के आपस में टकराने से या फिर अलग होने पर भी भूंकप आता है।

भूकंप आने के मानव निर्मित कारण – Man-made Causes of Earthquake

  • परमाणु परीक्षण।
  • नाभिकीय और खदानों के विस्फोट।
  • गहरे कुओं से तेल निकालना या फिर किसी तरह का अपशिष्ट या तरल पदार्थ भरना।
  • विशाल बांध का निर्माण।

रिक्टर स्केल से मापी जाती है भूकंप की तीव्रता:

रिक्टर स्केल से भूकंप की तीव्रता मापी जाती है। आपको बता दें कि सिसमोमीटर द्धारा रिएक्टर स्केल में मापी गई भूकंप की तीव्रता 2-3 रिएक्टर में आती है, तो इसे सामान्य माना जाता है ,यानि कि इसके तहत हल्के झटकों का एहसास होता है।

इसमें ज्यादा नुकसान नहीं होता है, वहीं जब यह तीव्रता 7 से ज्यादा होती है, तो इस तीव्रता वाले भूकंप, बेहद खतरनाक और विनाशकारी होते हैं और सब-कुछ तहस नहस कर देते हैं।

भूकंप से नुकसान – Effects of Earthquake

  • भूकंप से कई जिंदगियां तबाह हो जाती हैं।
  • भीड़-भाड़ वाले इलाके में भूकंप से काफी नुकसान होता है, कई बड़ी इमारते पल भर में ढह जाती हैं, वहीं मलबों के नीचे भी कई लोग दब कर मर जाते हैं।
  • भूकंप से नदियों, जलाशयों के जल में उफान आ जाता है, जिससे सुनामी और बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है।
  • अत्याधिक तेज कंपन से धरती फंटना शुरु हो जाती है, अर्थात भूस्खलन की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

भूकंप आने पर अपनी सुरक्षा कैसे करें:

  • भूकंप जैसी भयावह आपदा पर काबू पाना तो मुमकिन नहीं है, लेकिन भूकंप आने पर घबराने की बजाय अगर समझदारी के साथ नीचे लिखी कुछ बातों पर ध्यान दिया जाए तो आप अपना बचाव कर सकते हैं –
  • ऐसे मकानों का निर्माण करवाना चाहिए जो कि भूकंप रोधी हों।
  • भूकंप के झटकों का एहसास होते ही, तुरंत घर से निकलकर खुले स्थानों पर जाएं, वहीं अगर घर से बाहर निकलने में टाइम लगे तो कमरे के कोने में या फिर किसी मजबूत फर्नीचर के नीचे जाकर छिप जाएं।
  • भूकंप के दौरान लिफ्ट का इस्तेमाल बिल्कुल भी न करें।
  • घर में उपलब्ध बिजली के सारे उपकरण को बंद कर दें, और बिजली का मेन स्विच बंद कर दें।
  • कार चलाते वक्त तुरंत कार से बाहर निकलें।

भूकंप से बचने के उपाय:

भूकंप जैसी भयावह आपदा के प्रभाव को रोका नहीं जा सकता है, लेकिन अगर सही दिशा में प्रयास किए जाएं तो इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है, भूकंप से बचना तो मुमकिन नहीं है, लेकिन अगर पहले से ही कुछ भूकंप मापने वाले यंत्र लगा दिए जाएं तो, पहले से ही भूकंप आने की जानकारी मिल सकेगी, जिससे लोगों को पहले से ही आगाह किया जा सकेगा।

अब तक आए सबसे बड़े भूकंप:

  • वाल्डिविया, चिली में 22 मई, 1960 को 9.5 की तीव्रता वाला भयंकर भूकंप आया था, जिसमें चिली समेत न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, फिलीपींस ने भारी तबाही मचाई थी और लाखों जिंदगियां इस भूंकप से बर्बाद हो गईं थी।
  • दक्षिण भारत में 9.2 की तीव्रता वाला भूकंप 26 दिसंबर, साल 2004 में आया था, जिसमें कई हजार लोगों की जान चली गई थी।
  • गुजरात के भुज में 26 जनवरी, 2001 में 7.7 की तीव्रता वाला विध्वंशकारी भूकंप आया था, जिसमें करीब 30 हजार से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी, और करोड़ों-अरबों रुपए की संपत्ति का नुकसान हुआ था।
  • हैती में 12 जनवरी, 2010 में 7 रिएक्टर की तीव्रता वाला भूकंप आया था, जिसमें करीब 1 लाख से ज्यादा लोग मारे गए थे।

भूकंप, जैसी भयावह और विध्वंशकारी आपदा को रोका तो नहीं जा सकता, लेकिन आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर इसका पूर्वानुमान लगाकर, इससे प्रभाव को कम जरूर किया जा सकता है।

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11 बड़े भूकंप कब आए और कहाँ आए?

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Essay on earthquake in hindi भूकंप पर निबंध.

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Essay on Earthquake in Hindi

hindiinhindi Essay on Earthquake in Hindi

प्रकृति का स्वभाव बड़ा विचित्र है – कभी कल्याणकारी तो कभी विनाशकारी। प्रकृति कब, कैसे और क्या रूप धारण कर लेगी, इसे समझ पाना अभी तक मनुष्य के बस की बात नहीं है। ज्ञान-विज्ञान की उन्नति के कारण यह कहा जाता है कि आज मनुष्य ने प्रकृति के सभी रहस्यों को जान लिया है और सुलझा लिया है, किन्तु यह बात सच नहीं जान पड़ती। मौसम-विज्ञानी घोषणा करते हैं कि अगले चौबीस घंटों में तेज वर्षा होगी या कड़ाके की ठंड पड़ेगी, किन्तु होता कुछ और ही है। वर्षा और ठंड के स्थान पर चिलचिलाती धूप खिल उठती है। विज्ञान और वैज्ञानिकों की जानकारियों और सफलताओं का सारा दंभ धरा का धरा रह जाता है। सच तो यह है कि प्रकृति अनंत है और उसका स्वभाव अबूझ। बाढ़, सूखा, अकाल, भूकंप प्रकृति के विनाशकारी रूप के ही पर्याय हैं जो असमय मानव जीवन में हाहाकार मचा देते है।

प्राकृतिक आपदाओं में भूकम्प ही सबसे अधिक विनाशकारी होता है। सचमुच भूकंप विनाश का दूसरा नाम है। इसके कारण जहां लाखों मकान धराशायी हो जाते हैं, वहीं बड़ी संख्या में लोग असमय ही मृत्यु का ग्रास बन जाते हैं। कितने अपाहिज और लूले-लँगड़े होकर जीवन जीने को मजबूर हो जाते हैं। कभी-कभी तो पूरा शहर ही धरती के गर्भ में समा जाता है और नदियाँ अपना मार्ग परिवर्तित कर लेती हैं। भूतल पर नए भू-आकार जन्म ले लेते हैं, जैसे कि द्वीप, झील, पठार आदि। कभी-कभी जलाच्छादित भूमि समुद्र से बाहर निकल आती है। भूतल पर आए परिवर्तन मनुष्य के जीवन को भी प्रभावित करते हैं।

भूकंप शब्द का अर्थ होता है – पृथ्वी का हिलना। पृथ्वी के गर्भ में किसी प्रकार की हलचल के कारण जब धरती का कोई भाग हिलने लगता है, कंपित होने लगता है तो उसे भूकंप की संज्ञा दी जाती है। अधिकतर कंपन हल्के होते हैं और उनका पता नहीं चलता, न ही उनका हमारे जीवन पर कोई बुरा प्रभाव पड़ता है। मुख्य रूप से हम पृथ्वी के उन झटकों को ही भूकंप कहते हैं, जिनका हम अनुभव करते हैं। भूकंप के मुख्य कारणों में पृथ्वी के भीतर की चट्टानों का हिलना, ज्वालामुखी का फटना आदि हैं। इनके अतिरिक्त भू-स्खलन, बम फटने तथा भारी वाहनों या रेलगाड़ियों की तीव्र गति से भी कंपन पैदा होते हैं।

देश के इतिहास में सबसे भयानक भूकंप 11 अक्तूबर 1737 में बंगाल में आया था जिसमें लगभग तीन लाख लोग काल के गाल में समा गए थे। महाराष्ट्र के लातूर और उस्मानाबाद जिलों में आए विनाशकारी भूकंप ने करीब 40 गाँवों में भयानक तबाही मचाई। इसी कड़ी में 26 जनवरी, 2001 का दिन भारतीय गणतंत्र में काला दिन बन गया। उस दिन सुबह जब पूरा राष्ट्र गणतंत्र दिवस मना रहा था, प्रकृति के प्रलयंकारी तांडव ने भूकम्प का रूप लेकर गुजरात को धर दबोचा। देखते ही देखते भुज, अंजार और भचाऊ क्षेत्र कब्रिस्तान में बदल गए। गुजरात का वैभव कुछ ही क्षणों में खंडहरों में परिवर्तित हो गया। बहुमंजिली इमारतें देखते ही देखते मलबे के ढेर में बदल गईं। चारों ओर चीख-पुकार, बदहवासी और लाचारी का आलम था। अचानक हुई इस विनाशलीला ने लोगों के कंठ से वाणी और आँख से आंसू ही छीन लिए।

रैक्टर पैमाने पर गुजरात के इस भूकंप की तीव्रता 6.9 थी। इसका केन्द्र भुज से 20 कि-मी उत्तर-पूर्व में था। इस त्रासदी में हजारों की संख्या में लोग काल कवलित हो गए और कई हजार घायल हो गए, और लगभग एक लाख लोग बेघर हो गए। सारा देश इस त्रासदी में गुजरात के साथ था। सर्वप्रथम क्षेत्रीय लोग और स्वयं सेवी संस्थाओं ने राहत और बचाव कार्य आरम्भ किया। मीडिया की अहम भूमिका ने त्रासदी की गंभीरता का सही-सही प्रसारण कर भारत सरकार को झकझोरा और भारत सहित समूचे विश्व को सहायता के लिए उद्वेलित कर दिया। सारा जनमानस सहायता के लिए उमड़ पड़ा। भारत के कोने-कोने तथा विश्व के अनेक देशों से सहायता सामग्री का अंबार लग गया। सहायता के लिए धन-राशि के साथ-साथ अन्य आवश्यक सामग्री भी पहुंचने लगी। देश की तीनों सेनाओं के सैनिक तथा कई समाज सेवी संस्थाओं के कार्यकर्ता भी सहायता-कार्य में जुट गए। इस त्रासदी में करोड़ों रुपए की निजी तथा सार्वजनिक सम्पत्ति के नुकसान होने का अनुमान आंका गया।

क्या मनुष्य सदैव इस विनाशलीला का मूकदर्शक बना रहेगा, इस त्रासदी को भोगता रहेगा ? यद्यपि विज्ञान ने भूकंप की पूर्व सूचना देने के सम्बन्ध में उल्लेखनीय प्रगति की है, उपग्रह भी इस दिशा में काफ़ी सहायक सिद्ध हो रहे हैं। तथापि इन भूकंपों को कैसे रोका जा सकता है इस दिशा में अभी तक कोई निर्णायक सफलता प्राप्त नहीं हुई है। आज तो स्थिति यह है कि विज्ञान जब तक कोई और नया चमत्कार न दिखला दे, तब तक मनुष्य को भूकंप की त्रासदी को किसी न किसी रूप में भोगना ही पड़ेगा। आशा है कि निकट भविष्य में विज्ञान कोई ऐसा चमत्कार दिखाएगा, जिससे मानव जाति इस त्रासदी से मुक्त हो सकेगी।

महाराष्ट्र का विनाशकारी भूकंप

30 सितम्बर, 1993 को रात करीब तीन बजकर छप्पन मिनट पर महाराष्ट्र की भूमि की कोख में भयंकर हलचल शुरू हुई। भूकंप का एक अति तीव्र झटका आया। धरती कांपने लगी। प्रकृति की विनाश लीला आरंभ हो चुकी थी। आप ने किताबों अखबारों या अन्य माध्यमों से इस भयंकर भूकंप के बारे में अवश्य सुना होगा। आपके माता-पिता को तत्कालीन राष्ट्रपति डा। शंकरदयाल शर्मा की वह भावुकता से सराबोर आह्वान अवश्य याद होगा, जिसे उन्होंने जनता के नाम संप्रेषित किया था। उन्होंने नम आँखों से सारे देश के नागरिकों से इस राष्ट्रीय आपदा को सहन करने में सहयोग देने की नैतिक अपील की थी और उसका व्यापक प्रभाव भी देखने को मिला था। लोगों ने भूकपपीड़ितों की तन-मन-धन से सहयता की थी। डॉक्टरों, सेवादारों और बचाव कर्मियों की टोलियां तुरन्त ही महाराष्ट्र के लिए पूरे देश भर से निकलने लगी थीं। सरकारी तौर पर भी इस आपदा से मुक्ति का प्रयास व्यापक पैमाने पर किया जा रहा था।

रात्रि के समय आने वाला यह भूकंप अति विनाशकारी सिद्ध हुआ। उसने निद्रा में डूबे हुए लोगों को सदा-सदा के लिए चिरनिद्रा में सुला दिया। लोग जिस स्थान पर सो रहे थे, इस विनाशकारी भूकंप ने उन्हें उनके स्थान पर दफन कर दिया। जो कभी उनका शयन कक्ष हुआ करता था, वही क्षणभर में उनकी कब्र बन गया। इस भूकंप का प्रभाव अत्यंत व्यापक था। देश-विदेश तक में इस की खबरें आयी और इसे सदी का भयानक भूकंप बताया गया। रेक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 6.4 बताई गयी। जिस गहन रात्रि में यह भूकंप आया था वह रात्रि एक प्रकार से काल की क्रूरता का एक खेल सी बन गयी थी। इस भूकंप का पहला झटका 3.56 मिनट तक महसूस किया गया और दूसरा 4.42 मिनट तक इस विनाशलीला की गति यहीं पर नहीं रुकी। कुछ समय बाद एक तीसरा झटका भी आया, जो करीब 6.40 मिनट तक महसूस किया गया।

एक पाश्चात्य भू-वैज्ञानिक का स्पष्ट मानना था कि इस तीव्रता एवं क्षमता वाला भूकंप एक वृहद क्षेत्र को अतिशीघ्र ध्वस्त कर देने की प्रबल क्षमता रखता है। हुआ भी वही, महाराष्ट्र का एक बड़ा क्षेत्र इसकी चपेट में आया और बुरी तरह से ध्वस्त हो गया। महाराष्ट्र के लातूर से लेकर कर्नाटक के गुलबर्गा तक इसका प्रभाव देखा गया। किन्तु इस भूकंप ने जिस क्षेत्र को भयावह रूप से बर्बाद किया, वह था महाराष्ट्र के लातूर और उस्मानाबाद जिले के उभरेगा और किल्लारी तालुका नामक कस्बे। इन क्षेत्रों में इस रात्रि को मृत्यु का नंगा नाच होता रहा। मानो पृथ्वी अपना स्वाभाविक धर्म छोड़कर मनुष्य का शत्रु हो गयी हो और उसे अपना ग्रास बनाने की भावना से आप्लावित हो रही हो। मनुष्य ही नहीं, पशु-पक्षी, वृक्ष आदि सभी इस विनाशलीला का शिकार हुए। तड़पते हुए मानव, असहाय होकर मृत्यु को अपनी आंखों के सामने खड़ा देख रहे थे। मानों समस्त प्रकृति ही नहीं अपितु ब्रम्हा भी अपनी मानव-संतान से मोह तोड़ चुके हों। बारिस के कहर ने इस विनाशलीला को और भी भयानक बना दिया। तेज बारिस शुरू हो गयी और इसके कारण बचाव कार्य शिथिल होता रहा। जिस शीघ्रता और अनुपात में भूकंप पीड़ितों को सहायता चाहिए थी वह उन्हें सरकार चाहकर भी नहीं दे सकी। किन्तु यह स्थिति बहुत देर तक बनी नहीं रह सकी। भारतीयों की यही विशेषता है कि समय पड़ने पर वह फिर किसी भी प्रकार की प्रतिकूलता को आड़े नहीं आने देते, अपितु ऐसी प्रतिकूलताएं उन्हें अपने कार्य के प्रति और भी जुझारू बना देती हैं।

सरकार ने भी अपने मानवीय सरोकारों को इस मौकेपर भूलाया नहीं। जिस भांति भी संभव हुआ, प्रभावित क्षेत्र को आवश्यक सहायता प्रदान की जाती रही। सहायता राशि के रूप में केन्द्र सरकार ने करोड़ों रुपए प्रदान किए। राज्य सरकारों ने भी अपने निवासियों के दुःख दर्द को पूरी तरह समझा और उनके पुनर्वास के लिए हर संभव सरकारी सहायता प्रदान की। किन्तु जैसे कहा भी जाता है कि भाग्य में जो लिखा होता है वही होता है, करीब 2 लाख लोग इससे प्रभावित हुए, जिसमें मरने वालों की संख्या हजारों में थी।

सरकार को इस प्रकार की आपदाओं से देशवासियों को बचाने के लिए एहतियाती कदम उठाने चाहिए और नयी तकनीक ग्रहण करनी चाहिए ताकि ऐसे प्रकोप के प्रभाव को सीमित किया जा सके।

सन् 1991 का विनाशकारी भूकम्प

20 अक्टूबर सन् 1991 की वह गहरी रात्रि हम भारतीयों के लिए सचमुच एक प्रलयकारी रात्रि सिद्ध हुई। उस दिन करीब 45 सेकन्ड तक की समय अवधि का एक भकंप आया था जिसकी तीव्रता विशेषज्ञों ने रिएक्टर पैमाने के अनुसार 6।1 बतलायी। इसे करीब 330 किलो टन परमाणु विस्फोट के बराबर कहा जा सकता है। इस भूकंप की जो रिर्पोटिंग बी।बी।सी लंदन ने की थी, उसे देखकर ही हम इस भूकंप से प्रभावित क्षेत्र में हुए धन-बल और जन-बल के भयानक विनाश की सहज ही कल्पना कर सकते हैं। उसके अनुसार “भूकंप में मरने वालों की संख्या तीन हजार से उपर पहुँच चुकी है और लगभग दस हजार लोग घायल हुए हैं।” इस भयंकर भूकंप से 175 करोड़ रूपये की धनराशि का नुकसान हुआ।

भूकंप एक प्राकृतिक आपदा है और यह अन्य प्राकृतिक आपदाओं की तुलना में ज्यादा घातक और विनाशकारी प्राकृतिक आपदा होती है। इसका कारण यह भी है कि इसके कारण मानव-समाज कतिपय अन्य अपदाओं और समस्याओं से घिर जाता है। भौगोलिक-विशिष्टता भी इस भूकंप रूपी प्राकृतिक आपदा की मार को और ज्यादा मारक बना देती है। जैसे 1991 में आया यह भूकंप गढ़वाल और कुमाऊँ मण्डल को बना दिया। यह भू-क्षेत्र भौगोलिक रूप से एक पर्वतीय क्षेत्र है। इस भू-क्षेत्र में अनेक बड़े-बड़े पर्वतों के साथ साथ अनेक गहरी घाटियां भी विद्यमान हैं। साथ ही इनके मध्य में अपने पूरे वेग से प्रवाहित होने वाली अनेक गहरी नदियां भी अवस्थित हैं। यह सब मिलकर इस भू-क्षेत्र को सामान्य रूप से एक अत्यंत विषम स्थल का रूप दे देते हैं। सन् 1991 में जो विनाशकारी भूकंप इस क्षेत्र में आया, उसकी विनाशलीला को और अधिक बढ़ाने में इस भू-क्षेत्र की भौगोलिक-विशिष्टता ने भी अपना पूरा योग दिया।

सन् 1991 का यह विनाशकारी-भूकंप जिस समय आया था वह समय गहन रात्रि का समय था। सारे लोग दिन भर के परिश्रमपूर्ण कार्यों को सम्पन्न करके थकान मिटा रहे थे और अगले दिन के लिए पूर्णत: तैयार होने के लिए आरामदायक मीठी नींद ले रहे थे। कहा भी जाता है कि सोया हुआ आदमी मरे हुए आदमी के सादृश ही होता है। उसे अपने आस-पास के वातावरण का किंचित मात्र भी ज्ञान या बोध नहीं रहता। वह पूर्णत: एक गहरी नींद में डूबा होता है। 20 अकूबर का यह रात्रि भी इसी प्रकार की स्थिति में थी। इस भू-क्षेत्र का प्रत्येक मनुष्य गहरी नींद में डूबा हुआ था। और तभी दुर्भाग्य ने अपना प्रलयंकारी खेल खेलना आरम्भ कर दिया। हजारों की संख्या में लोग इस प्रलयंकारी भूकंप की चपेट में आ गये। वो जहां सो रहे थे वहीं दफन हो गये। उनके कठिन परिश्रम से बनाए गये मकान उन्हीं का मृत्यु का सामान बन गये। वो मकान उन्ही के उपर भरभरा कर आ गिरे और लोग अपने ही घरों के मलवे में दफन होने लगें।

इस भूकंप की तीव्रता अत्यधिक थी। इसके कारण वह समूचा पर्वतीय क्षेत्र व्यापक रूप से आक्रांत हो उठा और पर्वतों में स्खलन उत्पन्न हो गया। भू-स्खलन के कारण यह विनाशलीला और भी बढ़ गयी। पर्वत टूट-टूटकर नीचे बह रही नदियों में आ गिरे जिसके फलस्वरूप नदियों का बहाव भी बाधित हो गया और उसका पानी आस-पास के क्षेत्रों में भर गया। एकदम सी बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गयी। इस प्रकार हम हर तरफ से देखें तो यही कहा जा सकता है कि गढ़वाल और कुमाऊँ मण्डल में आया यह भूकंप अनेक रूपों में दिखलायी पड़ा। यह अपने साथ अन्य अनेक दुश्कर आपदाएं लिए हुए आया था।

इस भूकंप का जो प्रभाव इस क्षेत्र के लोगों के जीवन पर पड़ा था वह अत्यंत व्यापक और विस्तृत था। इससे न केवल जन-हानि और धन हानि ही हुई थी अपितु वहाँ के विकास हेतु कियान्वित की गयी महत्वपूर्ण योजनाएं भी बाधित हो गयी थी। इन्हीं में से एक योजना थी ‘टिहरी बांध’ की महत्वाकांक्षी योजना। इस भूकंप ने इस महत्वपूर्ण योजना को लगभग बर्बाद ही कर दिया था। बाद में, इस योजना को पुन: गतिशील और सुचारू करने में सरकार को अतिरिक्त पर्याप्त धन का व्यय करना पड़ा।

भूकंप ने इस मार्ग के आवागमन के प्राय: हर मार्ग को बाधित कर दिया। अनेक पुलों का नाश हो गया। यह धर्म-भूमि माना जाने वाला क्षेत्र है। पूरे वर्ष इस क्षेत्र में विदेशी पर्यटकों का तांता लगा रहता है। और जिस समय यह भूकंप आया उस समय भी इस क्षेत्र में अनेक विदेशी पर्यटक विद्यमान थे। उनके वहाँ फँस जाने से समस्या और भी ज्यादा गंभीर हो गयी थी।

उस समय कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। उन्होंने इस आपदा से पूर्णत: निपटने के लिए अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए। नाना भांति की सहायता वहाँ तत्काल भेजी गयी। केन्द्र सरकार ने भी समस्या की विकरालता को देखते हुए पानी की तरह पैसा बहाया। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि यह एक ऐसी आपदा थी जिसने भारत को हिला कर रख दिया था।

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भूकंप पर निबंध Earthquake in Hindi

भूकंप पर निबंध Essay on Earthquake in Hindi

इस लेख में हमने भूकंप पर निबंध (Essay on Earthquake in Hindi) आकर्षक रूप से लिखा है। इस लेख में भूकंप क्या है तथा भूकंप आने के कारण साथ ही भूकंप से बचाव के उपाय सरल रूप में दिया गया है।

Table of Contents

प्रस्तावना (भूकंप पर निबंध Essay on Earthquake in Hindi)

प्रकृति समय-समय पर स्वयं में परिवर्तन करती रहती है। जिसे हम भूकंप, बाढ़ तथा चक्रवात के रूप में देख सकते हैं। भूकंप आने के पीछे मनुष्य का पर्यावरण के तरफ उदासीन भाव भी होता है। आज मनुष्य स्वार्थवश प्रकृति का दोहन कर रहा है।

जब मनुष्य द्वारा या प्राकृतिक रूप से पर्यावरण में व्यतिरेक उत्पन्न होता है तब प्रकृति खुद को अपने मूल स्थिति में लाने के लिए भूकंप का सहारा लेती है।

भूकंप के कारण सजीव और निर्जीव दोनों की हानि होती है लेकिन मानव जाति कुछ ही दिनों में प्रकृति का दोहन फिर से शुरू कर देती है।

आज पर्यावरण दोहन अपने चरम पर है। वैज्ञानिकों ने एक स्वर में कहा है की आज के जितना प्रकृति दोहन पहले कभी नहीं हुआ है। जिसके कारण आज तापमान तेजी से बढ़ रहा है। असमय वर्षा और मौसम का बदलाव तथा भूकंप से बड़ी मात्रा में विनाश हो रहा है।

अगर प्रकृति के दोहन को रोक कर फिर से उसे पहले जैसा नहीं किया गया तो वह समय दूर नहीं जब धरती पर जीवन का नामोनिशान नहीं बचेगा।

भूकंप क्या है? What is Earthquake in Hindi?

जब धरती की प्लेटें आपस में टकराती हैं तब उनमें कंपन्न उत्पन्न होता है जिसे भूकंप कहा जाता है। भूकंप को सबसे घातक प्राकृतिक आपदाओं में से एक माना जाता है।

भूकंप के वक़्त होने वाले कंपन्न से बड़ी मात्रा में धन तथा जान माल का नुकसान होता है जिसकी भरपाई करने में काफी समय गुजर जाता है।

इसकी अधिक तीव्रता के कारण जमीन फट सकती है तथा हिमपर्वत भी पिघल सकते हैं जिसके कारण बाढ़ या सुनामी जैसे हालात भी बन जाते हैं।

भूकंप के चार प्रकार होते हैं। विवर्तनिक, ज्वालामुखी, विस्फ़ोट तथा पतन। विवर्तनिक प्रकार के भूकंप को सामान्य भूकंप कहते हैं। जब भूकंप का कंपन्न अधिक होता है तब उसके कंपन्न से ज्वालामुखी की परते खुल जाती है और ज्वालामुखी जागृत हो जाता है। 

कई बार जब भूकंप आने के बाद धरती फट जाती है या किसी जगह से किन्ही गैस या तेल का प्रवाह निकलने लगता है, तो उसे विस्फ़ोटक प्रकार का भूकंप कहते हैं। 

जब भूकंप के कारण समुन्द्र अपने स्तर से ऊँचा उठ जाता है और बड़ी-बड़ी लहरे उत्पन्न करने लगता है और सुनामी की शकल में सब कुछ तहस नहस कर देता है तो उसे पतन प्रकार के भूकंप के नाम से जाना जाता है।

भूकंप आने कारण Reasons of Earthquake in Hindi

पृथ्वी के अंदर कई प्रकार के तरल तथा पत्थर की प्लेटें समाई हुई हैं। जब यह प्लेटें टूटती हैं या अपने स्थान से खिसकती हैं, तो अचानक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ जाता है और फलस्वरूप उन दो चट्टानों के टकराने से एक कंपन्न उत्पन्न होता है जिसे भूकंप के नाम से जाना जाता है।

पृथ्वी एक निश्चित गति से सूर्य का चक्कर लगा रही है, साथ ही अपनी धुरी पर भी घूम रही है। लेकिन किन्हीं कारणवश इसकी प्राकृतिक बनावट में व्यतिरेक उत्पन्न होता है तो भूकंप आते हैं।

आज जिस प्रकार पेड़ों की कटाई हो रही है तथा प्रदूषण का स्तर बढ़ रहे हैं। यह सभी भी भूकंप के कारणों में शामिल हैं। पेड़ पौधे पर्यावरण के संतुलन को बनाए रखते हैं। पेड़ों की जड़ें जमीन में समाई होती हैं जिसके कारण जमीन एक दूसरे से जकड़ी होती हैं।

वृक्ष वर्षा चक्र को बनाए रखते हैं जिसके कारण धरती पर अनुकूल समय पर बरसात होती है तथा भूगर्भ की गर्मी कम होती है। इसके कारण इंसान को पीने का पानी धरती के ऊपरी स्तर पर ही मिल जाता है और उसे जमीन को गहरा खोदने की जरूरत नहीं पड़ती।

पर्यावरण प्रदूषण के कारण अम्ल वर्षा तथा ग्लोबल वार्मिंग में बढ़ोतरी हो रही हैं। जिसके कारण पेड़ पौधों तथा जमीन को नुकसान हो रहा हैं। यह सभी कारण हैं जिससे भूकंप आते हैं।

भूकंप के प्रभाव Impact of Earthquake in Hindi

मानव जीवन के लिए भूकंप अथवा कोई भी प्राकृतिक आपदाएं हानिकारक ही साबित होती हैं। भूकंप के प्रभाव से पशु पक्षी तथा इंसान कोई भी नहीं बच पाता।

भूकंप को रिक्टर स्केल के मापक पर मापा जाता है और 4 से ज्यादा रिक्टर स्केल के भूकंप को बहुत ही ज्यादा हानिकारक माना जाता है।

भूकंप के प्रभाव से बड़े-बड़े पेड़ अपनी जड़े खो देते हैं, ज्वालामुखी सक्रिय हो जाते हैं और धन का एक बड़े भाग का यूं ही नाश हो जाता है, जिसमें बड़ी बड़ी बिल्डिंगें, रेलवे ट्रैक, रोड तथा सांस्कृतिक विरासत भी शामिल हैं।

जापान में भूकंप की मात्रा बेहद अधिक होती हैं। जापान पूरी दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जहां पर एक भी प्राकृतिक नदियां नहीं है और जिसने भूकंप बाढ़ सुनामी से सबसे अधिक नुकसान झेला है। जापान में पांच रिक्टर स्केल के भूकंप को बेहद सामान्य माना जाता है।

इतिहास का सबसे खतरनाक भूकंप सन 1935 क्वेटा में आए भूकंप को माना जाता है। क्वेटा जैसे शहर की सुंदरता एक रात में नष्ट हो गई थी।

जिस स्थान को प्रवासियों के लिए स्वर्ग माना जाता था उस पर एक रात में कब्रिस्तान बनने का कलंक लग गया था। हजारों लाखों लोग नींद में ही काल के ग्रास बन गए थे और लाखों लोग घर से बेघर हो गए थे।

भूकंप से बचाव के उपाय (प्रबंधन) Earthquake Prevention Measures in Hindi

आधुनिक विज्ञान ऐसी कोई मशीन नहीं बना पाया है जिससे आने वाले भूकंप की जानकारी पहले से हो सके। लेकिन ऐसे कई बचाव के उपाय पुरानी किताबों में पाए गए हैं जिनसे बचाव मुमकिन हो सकता है। भूकंप से बचाव के रूप में सबसे पहला कदम मनुष्य का पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार होना है।

आज हम प्रकृति के प्रति बिल्कुल भी सचेत नहीं है। इंसानी मस्तिष्क ने ऐसी मशीनें वह हथियार बनाए हैं जिससे प्रकृति का सीधे नाश होता है। अगर प्रकृति के प्रकोप से बचना है तो ऐसी मशीनों को नष्ट करना होगा।

उदाहरण के तौर पर एयर कंडीशनर में से निकलती गैस CFC क्लोरोफ्लोरोकार्बन गैस को लिया जा सकता है। क्लोरोफ्लोरोकार्बन गैस का एक अणु ओजोन स्तर के एक लाख परमाणुओं का नाश करता है।

भूकंप से बचाव के लिए हमें वन संरक्षण को बढ़ाना होगा तथा वृक्षारोपण में तेजी लानी होगी। युद्ध के स्थान पर बातचीत को तवज्जो देना होगा क्योंकि पर्यावरण को सबसे अधिक नुकसान हथियारों के प्रयोग से होता है। 

निष्कर्ष Conclusion

इस लेख में अपने भूकंप पर निबंध (Essay on Earthquake in Hindi) बड़ा आशा ही आलेख आपको सरल तथा जानकारी से भरपूर लगा होगा। अगर यह लेख आपको पसंद आया हो तो इसे शेयर जरूर करें।

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भूकंप पर निबंध | Essay on Earthquake in Hindi

हेलो दोस्तों, आज हमलोग इस लेख में भूकंप पर निबंध के बारे में पड़ेंगे जो कि आपको क्लास 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 व अन्य competitive examination जैसे कि SSC, UPSC, BPSC जैसे उच्चाधिकारी वाले एग्जाम में अत्यंत लाभकारी साबित होंगे। भूकंप पर निबंध (Earthquake essay in Hindi) के अंतर्गत हम भूकंप से संबंधित पूरी जानकारी को विस्तार से जानेंगे इसलिए इसे अंत तक अवश्य पढ़ें।  

प्रस्तावना (Introduction)

‘भूकंप’ बस नाम ही काफ़ी है। ‘भू का कंपन’ यह विचार मात्र मानव के मन और मस्तिष्क में कंपन ही उत्पन्न नहीं करता वरन् झकझोर कर रख देता है। जब-जब प्रकृति ने अपने इस रूप के दर्शन कराए हैं, मानव की लाचारी और बेबसी ने घुटने टेक दिए हैं। मनुष्य की सारी प्रगति प्रकृति के इस रूप के समक्ष बौनी दिखाई देती है। प्रकृति के महाविनाश का यह भयानक रूप है जिसकी कोई कल्पना भी नहीं करना चाहता। 

लेकिन मनुष्य के कल्पना करने या न करने से प्रकृति के कार्यक्रमों में कोई अन्तर नहीं आता। प्रकृति ही मनुष्य को पालती है, वह आदिकाल से मनुष्य की सहचरी रही है किन्तु उसके अपने क्रियाकलाप भी हैं जिन्हें हम प्राकृतिक परिवर्तन के रूप में समझ सकते हैं। यदि मानव मस्तिष्क इसकी पूर्व जानकारी पा सकता है तो इतना भी मानव जाति के हित में होगा।

भूकंप क्या है? (Earthquake in Hindi)

जब पृथ्वी के भीतर का तरल पदार्थ अत्यधिक गर्म हो जाता है तो इसकी भाप का दबाव बहुत बढ़ जाता है। इस दबाव से धरती की कई सतहों में परिवर्तन होता है, वे इधर-उधर खिसकती हैं, हिलती-डुलती हैं और धरती के गर्भ में उथल-पुथल मचाती हैं। इससे पृथ्वी के ऊपरी स्तर को भी धक्का लगता है और हम इसे भूकंप कहते हैं।

भूकंप से बचाव

हमारे देश की प्रकृति ऐसी नहीं है जहाँ प्रायः भूकंप आते हों, जैसे जापान आदि देशों की है। ऐसे स्थानों पर लोग भूकंप बचाव की क्षमता वाली इमारतों का निर्माण करते हैं तथा लकड़ी आदि का प्रयोग करके छोटे-छोटे निवास स्थान बनाते हैं। वहाँ भूकंप से जान-माल की हानि से बचाव के उपाय किए जाते हैं।

इन्हें भी पढ़ें : सतर्क भारत समृद्ध भारत पर लेख हिंदी में

भूकंप के कारण (Causes of Earthquake)

भूकंप का हल्का-सा झटका बहुत हानिकारक नहीं होता क्योंकि धरती के भीतर रासायनिक प्रक्रिया के कारण हर समय भूगर्भ में हल्के-हल्के झटके लगते रहते हैं जो धरती पर भौतिक रूप में अपने चिह्न प्रकट भी करते हैं। किन्तु जोर के शक्तिशाली झटके महाविनाशी होते हैं। जब पृथ्वी के नीचे स्थित प्लेटो में घर्षण होता है तो वहां दबाव पैदा होता है। जिससे तरल पदार्थ निकलता है जो बहुत ही गर्म होता है। जिसका वाष्प बाहर निकलने का प्रयास करता है।

यही भूकंप का वास्तविक और वैज्ञानिक कारण है। हमारे पुराणों में मान्यता रही है कि धरती शेषनाग के फन पर टिकी है। जब धरती पर पापों का बोझ बढ़ जाता है, तब भगवान शेषनाग ही भूकंप के द्वारा अपना क्रोध प्रकट करते हैं।

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भूकंप का प्रभाव (Effect of Earthquake)

इस मान्यता का भी यदि यह अर्थ लिया जाए कि पृथ्वी पर प्रकृति के प्रकोपों को कम या शून्य करने के लिए शान्ति बनाए रखना बहुत ज़रूरी है तो इसमें कोई बुराई नहीं है। परिवर्तन तो प्रकृति का नियम है। इसे हम स्वस्थ चिन्तन के साथ लें तो ही अच्छा होगा। भूकंप कुछ सेकंड या मिनट ही रहता है परन्तु इतने कम समय में ही भारी विनाश हो जाता है। 

भूकंप के भारी झटके से धरती पर दरारें पड़ जाती हैं और उनमें से गर्म लावा और विषैली वायु बाहर निकलती है। देखते ही देखते बड़ी-बड़ी इमारतें धराशायी हो जाती हैं। कई बार बड़े-बड़े भवन धरती के गर्भ में फँस जाते हैं। हज़ारों लोग मलबे के नीचे दबकर मर जाते हैं या घायल हो जाते हैं। लाखों लोग बेसहारा तथा बेघर हो जाते हैं। कभी-कभी हरे-भरे गाँव तथा सुन्दर नगर खण्डहरों में बदल जाते हैं।

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भूकंप के कारण भू-स्खलन भी होता है, जो नदी वाहिकाओं को अवरुद्ध कर जलाशयों में बदल देता है। कई बार नदियाँ अपना रास्ता बदल लेती हैं जिससे प्रभावित क्षेत्र में बाढ़ और दूसरी आपदाएँ आ जाती हैं।

वर्ष 2001 में छब्बीस जनवरी प्रात:काल ऐसा ही महाविनाशकारी भूकंप गुजरात के भुज शहर में आया, जिसने कुछ ही मिनटों में पूरे शहर को एक मलबे के ढेर में बदल दिया। पूरा कच्छ प्रदेश भी काँप गया। सभी सहम गए, कोई कुछ न कर सका। 

वर्ष 1990 में उत्तरकाशी में भी ऐसा ही महाविनाशकारी भूकंप आया था। इस स्थिति में नदियों के प्रवाह, समुद्र और पर्वतों के स्थान भी बदल जाते हैं। कभी-कभी ज़मीन के नीचे दबे हुए प्राचीन संस्कृति तथा सभ्यता के अवशेष भूकंप के कारण बाहर निकल आते हैं। ऊपर की धरती नीचे तथा नीचे की धरती ऊपर आ जाती है।

भूकंप से बचाव के लिये उठाये गए कदम

कच्छ (गुजरात), लाटूर (महाराष्ट्र) में भयंकर भूकंप आए हैं। भूकम्प द्वारा हुई क्षति (हानि) को दृष्टि में रखते हुए अब हमारी सरकार ने इस दिशा में विशेष क़दम उठाए हैं तथा इस तरह के भवन निर्माण करने की योजना है जिससे भूकम्प आने पर कम से कम क्षति हो।

भूकंप के पश्चात् सरकारी और गैर-सरकारी लोगों तथा संस्थाओं द्वारा राहत कार्य शुरू होते हैं। भूकंप पीड़ितों को अन्न, वस्त्र, दवाइयों आदि की सहायता पहुँचाई जाती है। मलबा हटाया जाता है, खुदाई की जाती है। मलबे के नीचे दबे हुए लोगों में से कई जीवित भी पाए जाते हैं। इस समय इस राहत कार्य के साथ-साथ लोगों को सदमे की हालत से बाहर लाने की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। 

मनुष्य की मानवता और सेवा भावना भी ऐसे ही समय प्रकट होती है। सरकार के लिए पूरे क्षेत्र की भंग हुई संचार, यातायात, पानी और बिजली की व्यवस्था आदि का कार्य विस्तृत रूप ले लेता है। ऐसे समय में सभी से यथासंभव सहायता और सहयोग की आशा की जाती है। यह संसार एक दूसरे के सहयोग से ही चलता है। 

भूकंप से होने वाले हानि को कम करने के उपाय 

दूसरी आपदाओं की तुलना में भूकंप अधिक विध्वंसकारी हैं। चूँकि यह परिवहन और संचार व्यवस्था भी नष्ट कर देते हैं इसलिए लोगों तक राहत पहुँचाना कठिन होता है। भूकंप को रोका नहीं जा सकता। अतः इसके लिए विकल्प यह है कि इस आपदा से निपटने की तैयारी रखी जाए और इससे होने वाले नुकसान को कम किया जाए। इसके निम्नलिखित तरीके हैं : 

(i) भूकंप नियंत्रण केंद्रों की स्थापना, जिससे भूकंप संभावित क्षेत्रों में लोगों को सूचना पहुँचाई जा सके। GPS (Geographical Positioning System) की मदद से प्लेट हलचल का पता लगाया जा सकता है। 

(ii) देश में भूकंप संभावित क्षेत्रों का सुभेद्यता मानचित्र तैयार करना और संभावित जोखिम की सूचना लोगों तक पहुँचाना तथा उन्हें इसके प्रभाव को कम करने के बारे में शिक्षित करना।। 

(iii) भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में घरों के प्रकार और भवन डिज़ाइन में सुधार लाना। ऐसे क्षेत्रों में ऊँची इमारतें, बड़े औद्योगिक संस्थान और शहरीकरण को बढ़ावा न देना। 

(iv) अंततः भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में भूकंप प्रतिरोधी (resistant) इमारतें बनाना और सुभेद्य क्षेत्रों में हल्के निर्माण सामग्री का इस्तेमाल करना।

भूकंप और मनोबल में संबंध

भूकंप की स्थिति में सबसे अधिक काम आता है व्यक्ति का स्वयं का मनोबल। हमें सुख की भाँति दु:ख लिए भी समान रूप से तैयार रहना चाहिए। सुख और आनन्द की भाँति आपदाएँ, विपदाएँ भी आएँगी परन्तु जो बहादुर हैं, उनका धैर्यपूर्वक मुक़ाबला करते हैं, जीवन का आनन्द बार-बार उनका स्वागत करता है। जो कमज़ोर हैं, धैर्य नहीं रखते हैं, भूकंप के एक-दो झटकों में ही उनकी हृदयगति रुक जाती है। 

जिससे आगे का दृश्य झेलने और देखने का न उनमें साहस होता है, न ही उन्हें अवसर मिलता है। कठिन समय में ही व्यक्ति के धैर्य की परीक्षा होती है। ऐसे समय का जो बहादुरी से सामना कर गए वे जी गए। जीवन जीने के लिए है और यह सिर्फ बहादुरों के लिए है।

Frequently Asked Questions (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

उत्तर: L तिरंगे

उत्तर: सुनामी

उत्तर: भूकंप की तीव्रता

उत्तर: भूकंपीय तरंगों को

उत्तर: भूकंप

उत्तर: टेकटोनिज्म

उत्तर: सीस्मोलॉजी

उत्तर: जॉन मिल

उत्तर: 0 से 10

उत्तर: मरकैली मापनी (Mercalli Scale)

उत्तर: P (प्राथमिक या अनुदैर्ध्य तरंग)

उपसंहार (Conclusion)

दोस्तों मुझे आशा है कि आपको हमारा लेख भूकंप पर निबंध (Essay on Earthquake in Hindi)  पढ़ कर अच्छा लगा होगा और आपके सभी प्रश्नों के उत्तर मिल गए होगें।

यदि आपको यह लेख अच्छा लगा हो इससे आपको कुछ सीखने को मिला हो तो आप अपनी प्रसन्नता और उत्सुकता को दर्शाने के लिए कृपया इस पोस्ट को Social Networks जैसे कि Facebook , Google+, Twitter इत्यादि पर Share कीजिए।

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भूकंप पर निबंध (Earthquake Essay In Hindi)

भूकंप पर निबंध (Earthquake Essay In Hindi Language)

आज   हम भूकंप पर निबंध (Essay On Earthquake In Hindi) लिखेंगे। भूकंप पर लिखा यह निबंध बच्चो (kids) और class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए लिखा गया है।

भूकंप पर लिखा हुआ यह निबंध (Essay On Earthquake In Hindi) आप अपने स्कूल या फिर कॉलेज प्रोजेक्ट के लिए इस्तेमाल कर सकते है। आपको हमारे इस वेबसाइट पर और भी कही विषयो पर हिंदी में निबंध मिलेंगे , जिन्हे आप पढ़ सकते है।

हमारी इस धरती पर कई प्रकार की प्राकृतिक आपदाएं आती हैं, जिनके माध्यम से सामान्य जनजीवन को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। किसी भी प्राकृतिक आपदा से कई प्रकार की हानियां होती हैं, जिनमें मुख्य रूप से भूकंप शामिल है। जो कहीं ना कहीं हमारे अंदर डर और घबराहट के भाव उत्पन्न करता है।

भूकंप क्या है?

भूकंप एक ऐसे प्राकृतिक आपदा के रूप में जाना जाता है, जिसमें धरती के आंतरिक सतह के अधिक गर्म हो जाने की वजह से ऊपरी सतह पर एक कंपन उत्पन्न होती है और इस स्थिति को ही भूकंप कहा जाता है। जब भी भूकंप आता है, तो हमेशा उसकी तीव्रता के आधार पर ही इस बात की गणना की जाती है कि आने वाला भूकंप धीमा है या फिर तेज।

जब कभी भूकंप ज्यादा तीव्रता से आता है, तो ऐसी स्थिति में काफी मात्रा में नुकसान हो जाता है। जिसका भुगतान करना किसी के लिए भी आसान नहीं होता है।

भूकंप की तीव्रता का मापन

अगर भूकंप आता है तो ऐसी स्थिति में रिएक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता का मापन किया जाता है। जिसके आधार पर ही इस बात के बारे में जानकारी दी जाती है कि आने वाला भूकंप कितना खतरनाक था। ऐसे में सिस्मोग्राफ के माध्यम से भी भूकंप की तीव्रता के बारे में जानकारी ली जाती है।

भूकंप आने के मुख्य कारण

जब कभी खतरनाक भूकंप आता है, तो ऐसे में उनके कारणों को समझना आसान नहीं होता है। लेकिन भूकंप आने का एक विशेष कारण पृथ्वी में विभिन्न प्रकार के बने टेक्निकल प्लेट में आने वाली गति है, जिसके अंतर्गत यह टेक्निकल प्लेट आपस में टकराने लगते हैं और एक अतिरिक्त उर्जा बाहर निकलती है। जिस वजह से भूकंप की तरंगे उत्पन्न होती हैं और भूकंप का रूप लेकर त्रासदी का कारण बन जाती हैं।

भूकंप के माध्यम से होने वाले बड़े नुकसान

जब भी किसी क्षेत्र में भूकंप आता है, ऐसी स्थिति में वहा पर नुकसान भी काफी हद तक होता है। जिनमे होने वाले बड़े नुकसान कुछ इस प्रकार है। 

1) जब भी किसी क्षेत्र में भूकंप उत्पन्न होता है, तो उसके बाद पूरे इलाके को तहस-नहस हुआ देखा जाता है। जहां पर बड़ी बड़ी बिल्डिंग, इमारत, मंदिर, मस्जिद, चर्च, स्कूल, अस्पताल टूट-फूट कर बिखरे हुए होते हैं और काफी ज्यादा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है।

2) जब भी कोई खतरनाक भूकंप आता है, तो उसके माध्यम से बिजली की तारे टूट जाती हैं और उस स्थान पर बिजली का आवागमन रुक जाता है। कभी-कभी ऐसी जगहों पर बिजली को दोबारा लाने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है और काफी नुकसान उठाना पड़ जाता है।

3) भूकंप के आने से जानमाल का काफी ज्यादा नुकसान होता है और काफी लोगों की मौत हो जाती है। यही नहीं कही लोग बहुत ही गंभीर रूप से जख्मी हो जाते है, जिनमे बच्चे, बड़े और बूढ़े सभी लोग शामिल है। भूकंप के आने से लोगो के साथ साथ पशु पक्षियों का भी नुकसान होता है।

4) जब भी भूकंप आता है, तो परिवारों के बीच में दूरियां देखी जाती हैं। कई लोग भूकंप में अपने परिवार के सदस्यों को खो देते है। जहां कभी कभी इस बात का भी अंदाजा नहीं लगाया जा सकता कि परिवार का सदस्य जीवित है या नहीं? ऐसे में यह बड़े नुकसान की ओर इशारा करता है। ऐसे स्थिति में शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से मजबूत रहना आसान नहीं होता है।

भूकंप से बचने के कुछ खास उपाय

जब भी भूकंप आता है तो हमें कुछ समझ नहीं आता कि आगे हमें क्या करना चाहिए? ऐसी स्थिति में अगर आप कुछ उपाय करते हैं, तो निश्चित रूप से ही भूकंप में अपना बचाव कर सकते है। जिनमे से कुछ उपाय इस प्रकार है। 

1) जब कभी आप भूकंप के झटके या कंपन का एहसास करते हैं, तो जल्द से जल्द आपको ऐसी जगह पर चले जाना चाहिए जो खुली हो और जहा आस पास खाली जगह हो।

2) भूकंप आने का अहसास होते ही आपको सभी बिजली के स्विच को बंद कर देना चाहिए, ताकि ज्यादा नुकसान होने की संभावना ना रहे।

3) अगर आप किसी प्रकार का वाहन चला रहे है और आपको भूकंप के कंपन महसूस होते हैं, तो आपको तुरंत ही अपने वाहन को रोक देना चाहिए और वाहन से बाहर निकल कर खुली जगह चले जाना चाहिए।

4) एक बात हमेशा ध्यान में रखना चाहिए कि भूकंप से बचने के लिए आपको बिजली के तारों से भी दूर रहना चाहिए, ताकि जब भूकंप आये तो आपको बिजली के टूटी तारो से नुकसान ना हो सके।

5) भूकंप के आने पर कभी भी घबराना नहीं चाहिए, बल्कि हिम्मत से काम लेते हुए अपने आपको और अपने परिवार और दोस्तों को घर से बाहर किसी सुरक्षित जगह पर ले जाना चाहिए।

दुनिया के विभिन्न हिस्सों में आये हुए भूकंप

आज तक दुनिया के विभिन्न हिस्सों में कई प्रकार के घातक भूकंप आ चुके हैं, जिनके माध्यम से जनजीवन अस्त व्यस्त हो चुका है। जिनमे से कुछ भूकंप के बारे में निचे दिया गया है। 

1) पेरू में 1960 में आने वाला भूकंप आज भी लोगों के बीच में चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां लगभग 60,000 लोग भूकंप की चपेट में आए और कई लोगों की दर्दनाक मौत हुई थी।

2) इसके अलावा 1960 में इटली में आने वाले भूकंप की वजह से भी काफी तबाही देखी गई थी और उस समय का भूकंप इतना भयानक था कि लोगों के घर नष्ट हो चुके थे और जान माल का काफी नुकसान हुआ था।

3) 1958 में चीन में आने वाला भूकंप सबसे बड़ी तबाही के लिए जाना जाता है, जहां लगभग 100000 लोगों की मृत्यु हुई थी।

4) भारत के गुजरात में 2001 में आया भूकंप भी बहुत ही खतरनाक माना जाता है, जिसमे लगभग 200000 लोगों की मृत्यु हुई और कई हजारों लोग घर से बेघर हो गए थे।

5) इसके अलावा लातूर में 1933 में भूकंप की वजह से लगभग डेढ़ लाख लोगों की मृत्यु हुई और कई हजारों लोग बुरी तरह से घायल हुए थे और जान-माल का बहुत नुकसान हुआ था।

6) अभी हाल ही में टर्की में भूकंप आया था, जिसमे लगभग 50000 के आसपास लोगो की मृत्यु हुई और कई लोग जख्मी हुए है। यह भूकंप 6 फरवरी 2023 को आया था।

इस प्रकार से आज हमने भूकंप के बारे में उचित जानकारी प्राप्त की है, जिसका नाम सुनते ही मन में घबराहट होने लगती है। लेकिन अगर कुछ बातों का ध्यान रखा जाए, तो हम भूकंप जैसी प्राकृतिक विपदा से काफी हद तक सुरक्षित रह सकते हैं। हमे हमेशा प्राकृतिक आपदाओं के बारे में जानकारी रखनी चाहिए और पीड़ितों की हर तरह से मदद करनी चाहिए। 

इन्हे भी पढ़े :-

  • आपदा प्रबंधन पर निबंध (Disaster Management Essay In Hindi)
  • सूखा पर निबंध (Drought Essay In Hindi)
  • बाढ़ पर निबंध (Flood Essay In Hindi)

तो यह था भूकंप पर निबंध , आशा करता हूं कि भूकंप पर हिंदी में लिखा निबंध (Hindi Essay On Earthquake) आपको पसंद आया होगा। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा है , तो इस लेख को सभी के साथ शेयर करे।

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भूकंप की परिभाषा क्या है , (earthquake in hindi) , अवकेन्द्र (focus or hypocenter of an earthquake)

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अवकेन्द्र (focus or hypocenter of an earthquake) : यह पृथ्वी के आंतरिक भाग में स्थित वह क्षेत्र होता है जहाँ से भूकम्पीय तरंगे मुक्त होती है।  इसे भूकंप का उद्भव केंद्र कहते है। अधिकेन्द्र (epicenter of earthquake) : यह पृथ्वी की सतह पर स्थित वह स्थान होता है जहाँ भूकंपीय तरंगे सर्वप्रथम पहुंचती है।  यह अपकेन्द्र के ठीक ऊपर स्थित होता है। भूकंप के कारण सर्वाधिक विनाश इसी क्षेत्र में होता है।

भूकम्पीय तरंगे (seismic waves)

ये तरंगे सभी माध्यमो में चलती है।

भूकंपीय तरंगो का छाया क्षेत्र (shadow zone of earthquake)

P तरंगो का छाया क्षेत्र (shadow zone of p waves).

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P तरंगो का छाया क्षेत्र अधिकेन्द्र से 103 डिग्री से 142 डिग्री की कोणीय दूरी के मध्य पाया जाता है।  इस छाया क्षेत्र का निर्माण इसलिए होता है क्योंकि P तरंगे बाहरी कोर (क्रोड़) में प्रवेश करने पर अपवर्तित (refracted) हो जाती है।

S तरंगो का छाया क्षेत्र (shadow zone of s waves)

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भूकंप का मापन या भूकंप मापने के स्केल (scale for earthquake)

भूकंप के प्रमुख कारण (reasons of earthquake).

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यह सिद्धांत प्रोफेसर रीड द्वारा दिया गया।  प्रो. रीड के अनुसार चट्टानें रबर की भाँती होती है या खींचती है।  विपरीत दिशा से चट्टानों पर बल लगने पर चट्टने रबर की तरह एक सीमा तक खींचती है और विकृत हो जाने के बाद टूटने पर झटके से पुनः अपना वास्तविक आकार ग्रहण करती है और इस सम्पूर्ण प्रक्रिया के फलस्वरूप भूकंप आते है।

भूकंप के मानवजन्य कारण (anthropogenic reasons earthquake)

हिंदी माध्यम नोट्स.

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Home » Science » भूकंप क्या है और निबंध Information About Earthquake In Hindi

भूकंप क्या है और निबंध Information About Earthquake In Hindi

Information about earthquake in hindi भूकंप पर निबंध.

Information About Earthquake In Hindi  “भूकंप क्या है” Bhukamp Kya Hai के इस आर्टिकल Earthquake Essay In Hindi में भूकम्प पर निबंध  की बात करेंगे। भूकंप एक प्राकृतिक आपदा है जिसके आने का पूर्वानुमान नही होता है।भूकंप आने पर हमें तेज झटके महसूस होते है और जान और माल का बहुत नुकसान होता है।

Essay On Earthquake In Hindi भूकंप पर निबंध –

भूकंप क्या है What Is Earthquake In Hindi – हमारी धरती इनर कोर, मेंटल और आउटर कोर से बनी हुई है। मेंटल एक मोटी परत है जिन्हें टैकटोनिक प्लेट कहते है। ये टैकटोनिक प्लेट्स अपनी जगह से खिसकती रहती है। अगर ये प्लेट्स आपस में टकरा जाए तो तेज गति की तरंगें उत्पन्न होती है जिससे तेज कम्पन होता है और  भूकंप  आता है।

  • पृथ्वी की आंतरिक संरचना का अध्ययन करने के लिए इस आर्टिकल को पढे – Earth Information In Hindi

1. ज्वालामुखी के फटने पर भी भूकम्प के झटके आते है। जब हिरोशिमा और नागासाकी पर अमेरिका ने अणु बम गिराया था तब भी भूकम्प आया था। जब भी परमाणु परीक्षण होता है तब भूकम्प आता है।

भूकंप क्या है Earthquake Information In Hindi –

3. भूकंप के दौरान निकली ऊर्जा बहुत ज्यादा मात्रा में होती है जैसे 8 रिक्टर के भूकम्प में 60 लाख टन के बराबर ऊर्जा निकलती है।

4. भूकम्प की तीव्रता का पता भूकम्प Earthquake के केंद्र से निकली तरंगों से लगाया जाता है। इसी तरंग से भूकम्प का कम्पन उत्पन्न होता है। भूकम्प जिस जगह आता है वहा उसकी त्रीवता सबसे ज्यादा होती है और भूकंप क्षेत्र से दूर जाने पर भूकम्प की त्रीवता कम होती जाती है।

5. अगर भूकंप  धरती की ज्यादा गहराई में आते है तो भूकम्प के झटके कम महसूस होते है लेकिन अगर यही भूकम्प पृथ्वी की सतह के थोड़े नीचे ही आता है तो ज्यादा तीव्रता का भूकंप होता है जिससे जान माल का काफी नुकसान होता है। भूकंप का पूर्वानुमान लगाना नामुमकिन है जिससे इसके आने पर भयंकर तबाही होती है।

Essay On Earthquake In Hindi भूकंप पर निबंध

6. भारत मे भूकंप Earthquake संभावित क्षेत्रों को चार जोन में बांटा गया है। जोन 2, जोन 3, जोन 4 और जोन 5 में बांटा गया है जिसमे से जोन 5 सबसे खतरनाक जोन है। जोन 5 में जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश के हिस्से जोन 5 में आते है और दिल्ली एनसीआर का इलाका जोन 4 में है। जोन 2 में भारत का दक्षिणी इलाका आता है जबकि जोन 3 में मध्य भारत आते है। Information About Earthquake In Hindi

7. भारत के गुजरात राज्य मे 2001 में भीषण भूकम्प आ चुका है जिसमे हजारो लोग मारे गए थे। इंडोनेशिया, श्रीलंका, मलेशिया के समुद्र में आये भूकम्प से कई सौ मीटर की लहर उठी थी जिसे सुनामी कहा गया था।

8. प्रशांत महासागरीय बेल्ट भूकंप  के लिहाज से सबसे ज्यादा संवेदनशील है और यहां भूकम्प ज्वालामुखी, पर्वतीय क्षेत्रों में ज्यादा आते है। इस बेल्ट में जापान, फिलीपींस, केलिफोर्निया, चिली, अलास्का जैसे क्षेत्र आते है।

9. दुनिया मे जापान देश मे सबसे ज्यादा भूकम्प Earthquake आते है जिससे जापान को भूकम्पो का देश भी कहा जाता है। जापान देश मे हर साल 1500 से ज्यादा भूकम्प आते है। जापान में भूकम्प आने का मुख्य कारण वहां ज्वालामुखी की उपस्थिति है। जापान में भूकंप से बचाव के लिए मकान लकड़ी से बनाये जाते है।

10. केलिफोर्निया में मकान बनाते समय एक बिल्डिंग कोड फॉलो किया जाता है जिसके अनुसार ही मकान बनता है जिससे भूकम्प के समय जान माल का नुकसान कम होता है। भूकंप का अध्ययन विज्ञान की जिस शाखा में किया जाता है उसे Seismology कहते है।

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Essay on Earthquake in Hindi – भूकंप पर निबन्ध

November 18, 2017 by essaykiduniya

Get information about Earthquake in Hindi Language. Here you will get Paragraph and Short Essay on Earthquake in Hindi Language / Bhukamp Essay in Hindi Language for students of all Classes in 100, 200, 300, 400 words. यहां आपको सभी कक्षाओं के छात्रों के लिए हिंदी भाषा में भूकंप पर निबन्ध मिलेगा।

Essay on Earthquake in Hindi

Paragraph & Essay on Earthquake in Hindi – भूकंप पर निबन्ध ( 100 words )

भूकंप एक प्राकृतिक आपदा है जो कि बहुत ही नुकसानदायक है। भूकंप स्थलमंडल में ज्यादा मात्रा में ऊर्जा के मुक्त होने और नीचे की स्तह में प्लेटों के हिलने की वजह से होता है। भूकंप को मापने के लिए सिसमोग्राफ का प्रयोग किया जाता है। जब भूकंप आता है तो हमें झटके महसूस होते है और यह झटके इतने ताकतवर होते है कि ऊँची ऊँची इमारतों को भी गिरा देते हैं। भूकंप के आने पर बहुत से नगर तहस नहस हो जाते हैं। भूकंप के कारण मानव को जीवन की क्षति भी होती है। भूकंप आने पर हमें खुले मैदान में भाग जाना चाहिए और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने चाहिए।

Short Essay on Earthquake in Hindi Language – भूकंप पर निबन्ध ( 200 words )

भूकंप एक प्राकृतिक आपदा है जिसके आने की घोषणा पहले से नहीं की जा सकती है। भूकंप पहाड़ो वाले क्षेत्रों में अधिक आते हैं। भूकंप के आनो को बहुत सो कारण है जैसे अधिक गर्मी के कारण ज्वालामुखी का फटना। धरती के नीचे चट्टानों का खिसकना। धरती के नीचे मौजुद प्लेटस का टकराना या फिर खिसकना। भूकंप के आने पर धरती डोलने लगती है जिस वजह से मकान पेड़ पौधे आदि गिर जाते हैं और लाखों इंसान और पशु पक्षी उनके नीचे दब कर मर जाते हैं। भूकंप जब भी आता है बहुत तबाही मचाकर जाता है।

भूकंप धरती पर बोझ के कारण भी आता है और इसके आने पर सबसे ज्यादा खतरा ऊँची इमारतों के गिरनो का होता है। भूकंप के आने पर सभी लोगों को घर से बाहर खुले मैदान में चले जाने चाहिए। भूकंप के आने का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता लेकिन उससे बचने की बहुत सी तैयारियाँ की जा सकती हैं। इसके लिए लोगों को लकड़ी के घरों में रहने की सलाह दी जाती है। उन्हें अपने पास एक मोबाईल फोन और टॉर्च जरूर रखनी चाहिए। भूकंप को रोकना मनुष्य के लिए संभव नहीं है लेकिन पेड़ पौधे भूकंप से हमारी रक्षा करते हैं। इसलिए भूकंप जैसी आपदा रोकने को लिए हमें ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाना चाहिए।

Essay on Earthquake in Hindi Language – भूकंप पर निबन्ध ( 300 words )

भूकंप एक प्राकृतिक आपदा है जो किसी भी समय और कहीं भी पृथ्वी की सतह पर हो सकती है, जिससे जीवित प्राणियों और उपयोगी प्राकृतिक संसाधनों की बहुत गड़बड़ी होती है।

भूकंप के मुख्य कारणों में से एक प्लेट टेक्टोनिक्स है जो पृथ्वी की सतह में विवर्तनिक आंदोलनों का कारण बनता है। धरती की सतह के नीचे टेक्टोनिक प्लेटें एक-दूसरे के साथ टकराती हैं और दूसरे पर चढ़ाई करती हैं जो पहाड़ी निर्माण, भूकंप और ज्वालामुखी का कारण बन जाती हैं। यह प्रक्रिया ऊर्जा का एक विशाल स्तर जारी करती है जो एक बल बनाता है और इस प्रकार सतह आंदोलन।

जहां भी भूकंप होते हैं, जीवन और संपत्ति के नुकसान, भूस्खलन, वनस्पति और पशु जीवन का नुकसान, धरनाओं का विनाश और दोषों के विकास और पृथ्वी की सतह में भंग के अलावा आम तौर पर भूकंप होते हैं और ये सभी पर्यावरण क्षरण को जाता है। दुनिया में भयावह भूकंपों की सूची यहां बहुत लंबी है, जिनके बारे में यहां बताया गया है। भारत में, जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, पंजाब, दिल्ली, हरियाणा और महाराष्ट्र-उत्तर-पूर्वी राज्यों के क्षेत्रों में भूकंप की घटनाएं आम हैं।

सबसे हाल ही में भूकंप 26 जनवरी 2001 को गुजरात में और कश्मीर में 28 मार्च 1999 को हुई, जिसमें पूरे क्षेत्रीय पारिस्थितिक तंत्र से परेशान होने के अलावा संपत्ति और जीवन की भारी क्षति की सूचना मिली।

वास्तव में, प्राकृतिक खतरों के बीच भूकंप सबसे विनाशकारी होते हैं।

भूकंप से सुरक्षित रहने के तरीके : 

लोगों को शांत रहना चाहिए और दरवाजे के अंदर या बाहर रहना चाहिए, लेकिन खिड़कियों, इमारतों और बिजली लाइनों से दूर रहना चाहिए। उन्हें इमारत के केंद्र के पास की दीवार के द्वार पर खड़े होना चाहिए और कुछ भारी फर्जीचर जैसे डेस्क या टेबल के नीचे क्रॉल करना चाहिए। यदि कोई गाड़ी चला रहा है, तो उसे कार को रोकना चाहिए और भूकंप बंद होने तक अंदर रहना चाहिए।

Essay on Earthquake in Hindi – भूकंप पर निबन्ध ( 400 words )

भूकंप एक प्राकृतिक आपदा है जिसे भूचाल के नाम से भी जाना जाता है और इसकी तीव्रता से पता लगता है कि यह कितना विनाशकारी है। भूकंप अक्सर स्थलमंडल में अत्यधिक ऊर्जा के उतपन्न होने और पृथ्वी की सतह में परतों में कंपन के कारण आता है। अक्सर बहुत बार हम भूकंप के हल्के झटकों को महसूस करते है पर कई बार यह झटके बहुत ही खतरनाक होते हैं। भूकंप धरती की सतह में उठने वाली तरंगो से उत्पन्न होता है और भूकंप को रिएक्टर में मापा जाता है और इसे मापने के लिए सिस्मोमीटर का प्रयोग किया जाता है।

भूकंप में उठने वाली तरंगे तीन प्रकार की होती है। प्राथमिक तरंगे वह होती है जिनसे केवल दो या तीन रियेक्टर भूकंप आता है जिससे कोई हानि नहीं होती है। माध्यमिक तरंगों में हानि से सावधानी बरत कर बचा जा सकता है। इसमें चार से सात रिएक्टर तक का भूकंप आता है। सतह तरंगे वह तरंगे है जो बहुत ही आतंक मचाता है और यह 7 रिएक्टर से ज्यादा होता है।

भूकंप बहुत ही विनाशकारक है जिससे बहुत से नगर और कस्बें तबाह हो जाते है। भूकंप से बहुत सी ऊँची ईमारते ध्वस्त हो जाती है। भूकंप आने पर सबसे ज्यादा नुकसान जान का होता है।

भूकंप से पहले से ही सावधानियाँ बरतने से हम विनाश से बच सकते हैं। हमें खबरों में मिल रही चेतावनियों पर ध्यान देना चाहिए और भूकंप से बचने के इंतजाम करने चाहिए। हमें भूकंप आने पर बाहर खुले मैदान में चले जाना चाहिए और गैस सिलिंडर और बिजली के मेन स्विच को बंद कर देना चाहिए। भूकंप के समय यात्रा नहीं करनी चाहिए और वाहन में नहीं बैठना चाहिए। भूकंप के समय पर कभी भी ऊँची या पहाड़ी वाले स्थान पर खड़े नहीं होना चाहिए और न ही कुएँ के पास खड़ा होना चाहिए।

भूकंप एक प्राकृतिक आपदा है जिसके आने का कोई समय निर्धारित नहीं है और न हीं मनुष्य के पास इसका कोई समाधान नहीं है लेकिन फिर भी कुछ छोटे मोटे उपाय करके हानियौं से बचा जा सकता है। हम सबको आधुनिक विग्यान की सहायता लेकर भूकंप से बचने के उपाय करने चाहिए। पेड़ पौधे भी भूकंप से हमारी रक्षा करते है। हमें अपने साथ हमेशा पानी की बोतल, टॉर्च और आपातकालिन चिकित्सा बॉक्स रखना चाहिए। हमें भूकंप आने पर भयभीत नहीं होना चाहिए अपितु सुझ बुझ से इसका सामना करना चाहिए और दुसरों की भी मदद करनी चाहिए।

हम उम्मीद करेंगे कि आपको यह निबंध ( Essay on Earthquake in Hindi – भूकंप पर निबन्ध ) पसंद आएगा।

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Earthquake Information in Hindi – Effects, Causes, Terminology, etc

“इसमें कोई दो राय नहीं कि भूकंप प्राकृतिक आपदाओं (Natural Disaster) में से विनाशकारी आपदाओं में से एक है। इसके माध्यम से हम आपको – भूकंप क्या है? उसकी शब्दावली, कारण अथवा उससे क्या प्रभाव होते हैं, इस सब के बारे में चर्चा करेंगे।” (Earthquake Information in Hindi)

Table of Contents

भूकंप क्या है? (What is an Earthquake?)

भूकंप (Earthquake) पृथ्वी पर सबसे ज्यादा विनाशकारी आपदाओं (Natural Calamities) में से एक है। यह एक प्राकृतिक आपदा (Natural Disaster) है। यह दो शब्दों से मिलकर बना हुआ है – भू + कम्प / कंपन जिसका मतलब होता है ‘ पृथ्वी का कामना’ ।

याद रखें :-

“ पृथ्वी की Dictionary में कोई विकास और विनाश नाम का शब्द नहीं होता है। वह तो बस अपना कार्य करती रहती है अपने आप को संतुलन (Balance) करने के लिए पृथ्वी पर ऐसा होता रहता है जैसे – ज्वालामुखी सुनामी, बाढ़, भूकंप इत्यादि । यह पृथ्वी द्वारा संतुलन प्राप्त करने के प्रयास हैं।”

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भूकंप की  शब्दावली (Terminology of Earthquake)

भूकंप (Earthquake) को समझने से पहले हम कुछ इससे संबंधित शब्दावली (Terminology) को समझना काफी महत्वपूर्ण है।

  • पृथ्वी के अंदर जिस जगह से भूकंप (Earthquake) का उद्गम होता है उसको ‘बिन्दु केन्द्र या हाईपो सेंटर (Hypocenter)’ कहते है।
  • पृथ्वी के अंदर हाईपो सेंटर (Hypocenter) से अब हम लंबवत रूप में (Vertically) पृथ्वी की सतह की तरफ जाते हैं, जहां भूकंप की तरंगों का सबसे पहला प्रभाव पड़ता हैं, उस स्थान को ‘उपरिकेंद्र/ अधिकेंद्र (Epicenter) ‘ कहते हैं।

रिक्टर पैमाना (Richter Scale) (ML)

भूकंप (Earthquake) की तीव्रता को नापने के लिए रिक्टर पैमाने (Richter Scale) का इस्तेमाल किया जाता है। इसका जो पैमाना (Reading) होता है लगभग एक से दस  तक होता है।

  • 1 to 4 (ML)    –               Very Low Vibration
  • 4 to 6 (ML)    –               Medium
  • 6 (ML)           –               Strong
  • 7 (Ml)            –               Very Stong
  • 8 or 8 + (ML) –               Serve (Very Destruction)

एक अमेरिकी भूभौतिकीविद् (An American Geophysicist) ने “प्रत्यास्थ पुनश्चलन सिद्धांत (Elastic Rebound Theory)” का सिद्धांत दिया था। जिसमें उन्होंने बताया कि जिस तरह हम रबड़ (Rubber Band) को खींचते हैं तो उसमें हलचल पैदा होती है, वह अपनी स्थिति में ना होकर उसमें दबाव अथवा तनाव की स्थिति आ जाती है परंतु जब हम उसे छोड़ देते हैं तो वह फिर से अपनी स्थिति प्राप्त कर लेती है। ठीक उसी तरह इन चट्टानों (Rocks) की भी अपनी खिंचाव की सीमा है। (These Rocks have their own Limitations of Elasticity).

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भूकंप के कारण (Causes of Earthquake)

What is Earthquake? Earthquake Causes, Terminology and Effects of Earthquake.

भूकंप (Earthquake) एक प्राकृतिक आपदा (Natural Disaster) है जिसके दो कारण होते हैं – प्राकृतिक कारण (Natural Causes) (जैसे – चट्टान टूटना, समुद्र में मलवा इकट्ठा होना इत्यादि) जो कि अधिक तीव्रता वाले होते हैं।

जबकि मानवजनित कारण (Human Causes) जो तुलनात्मक हल्के होते हैं। (जैसे – बड़े बांध बनाना। इसके कारण पृथ्वी के भू – तल पर एक ही जगह बहुत अधिक दबाव पड़ता है) इसका सबसे अच्छा उदाहरण – 1967 में कोयना/koyna. महाराष्ट्र में जो भूकंप आया था, वह बांध के कारण ही आया था।

Important Points:-

  • मनुष्य भी प्रकृति को परेशान कर रहा है उसके कारण भी प्रकृति में असंतुलन की स्थिति आ जाती है उससे भी भूकंप (Earthquake) पैदा हो रहे हैं।
  • भूकंप (Earthquake) उन क्षेत्रों में ज्यादा आएंगे यहां की पृथ्वी किसी भी कारण से कमजोर होगी।
  • भूकंप (Earthquake) उन क्षेत्रों में ज्यादा आएंगे जहां ज्वालामुखी विस्फोट (Volcanic Activity) ज्यादा होंगे।
  • ज्वालामुखी और भूकंप का अंतर संबंध है, सामान्यतः जहां ज्वालामुखी आते हैं वहां भूकंप भी आते हैं।
  • भूपर्पटी (Crust) पर भ्रंश (Prolapse) या उभार/दरार (Bulge/Crack) आ जाते हैं।
  • भूकंप (Earthquake), प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत (Plate Tectonics Theory) के कारण आते हैं।
  • पृथ्वी में असंतुलन के कारण भूकंप आते हैं।
  • भूकंप (Earthquake) उन क्षेत्रों में ज्यादा आएंगे यहां भूकंप की पट्टी आया कौन होते हैं भूकंप के ज़ोन होते हैं। (जैसे – प्रशांत महासागर तटीय पट्टी, )

Read More :-  ईश्वर को समझने का अवसर – What is God – Where is God? Where is the God at the time of Lockdown ?

याद रखें :- “प्रकृति के शब्दकोश में विकास या विनाश जैसी कोई चीज नहीं है।“ (“There is no such thing as development or destruction in the Dictionary of the Nature”.)

भूकंप से होने वाले विनाश (Destruction) के बारे में तो आप जानते ही होंगे। लेकिन भूकंप से लाभ भी होते हैं चलिए हम आपको भूकंप से होने वाले कुछ लाभ के बारे में बताते हैं।

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भूकंप से होने वाले प्रभाव (Effects of Earthquake)

भूकंप से उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों से नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं और सकारात्मक भी।

भूकंप के नकारात्मक प्रभाव (Negetive Effects of Earthquake)

  • चारों तरफ तबाही (Destruction all around)
  • जान और माल का नुकसान (Loss of life and property)
  • तबाही का चरम स्तर (Extreme level of catastrophe)
  • पर्यावरण को नुकसान होना (Environmental damage)
  • चारों तरफ हाहाकार मच गया (Wreaking havoc all around)
  • रोजगार का छिन जाना (Lose employment)
  • लोगों के जीवन पर नकारात्मक चौतरफा प्रभाव करना (To have a negative all-round effect on the lives of people)
  • जमीन का कटाव एवं दरार पड़ना (Erosion and Cracks of the Ground)

भूकंप से होने वाले प्रभाव को देखें तो यह आम जीवन भर बहुत गंभीर होता है।

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भूकंप के सकारात्मक प्रभाव (Positive Effects of Earthquake)

ऐसा नहीं है कि भूकंप भी केवल नकारात्मक प्रभाव ही होते हैं इसके कुछ सकारात्मक प्रभाव भी होते हैं

  • पर्वतों की उत्पत्ति (Origin of Mountains) भूकंप (Earthquake) के कारण ही हुई है। भूकंप से केवल दरारें ही नहीं पड़ती है बल्कि उभार भी होते हैं। और पर्वतों के क्या लाभ हैं यह तो आप जानते ही हैं – वनस्पतियों से लेकर पर्यटन तक पर्वतों के अधिक लाभ होते हैं।
  • भूकंप इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पृथ्वी के अंदर ( भूमिगत) क्या चल रहा है, इसका स्वरूप प्रदान करता है।
  • समुद्र के तटवर्ती क्षेत्र प्राकृतिक बंदरगाह के बनाने में भूकंप का बहुत बड़ा योगदान होता है।
  • भूकंप के कारण कभी-कभी समुद्र में डूबी हुई जमीन बाहर आ जाती है जिससे द्वीपों का निर्माण होता है।
  • अन्य लाभ…

इस लेख के माध्यम से (Earthquake Information in Hindi) आपको – भूकंप क्या है? उसकी शब्दावली, कारण अथवा उससे क्या प्रभाव होते हैं, इस सब के के विषय में मूलभूत जानकारी (Basic Knowledge) दी गई है। हमें उम्मीद है कि आपको यह लेख पसंद आया होगा।

आपके सवाल और सुझावों का हमेशा से स्वागत है। आप हमें अपने सवाल और सुझाव कमेंट कर सकते हैं ।

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भूकंप पर निबन्ध | Essay on Earthquake in Hindi

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भूकंप पर निबन्ध | Essay on Earthquake in Hindi!

भूकंप का नाम लेते ही मन भय से काँप (Shiver) उठता है । जहाँ भूकंप होता है, वहाँ अनेक मकान ध्वस्त (Demolish) हो जाते हैं और मानव के साथ-साथ अनेक जीव-जंतु घरों में दबकर मरजाते हैं चारों-ओर-प्रलय (Total end) का दृश्य (Scene) उपस्थित हो जाता है ।

धरती काँपती है, तो कहीं नदी के बीच से जमीन निकल आती है, तो कहीं धरती फट कर झील (Lake) का रूप ले लेती है । भूकंप आता है और दे जाता है अनेक प्रकार के कष्ट और कई प्रकार की पीड़ा (Pain) ।

जापान को भूकंप का देश कहा जाता है । वहाँ आए दिन धरती डोलती रहती है । ये भूकप ज्वालामुखी (Volcano) के फटने के कारण होते हैं । जापान में ज्वालामुखी पहाड़ अधिक संख्या में है जो धरती के अन्दर गर्मी बढ़ जाने के कारण ज्वालामुखी अचानक फट पड़ता और धरती डोलने लगती है ।

ADVERTISEMENTS:

धरती के भीतर चट्‌टानों (Rocks) के इधर-उधर खिसकने (Move) से भी धरती डोलती है । इसलिए अधिक पहाड़ों वाले स्थानों पर भी भूकंप होता है क्योंकि वहाँ धरती पर दबाव (Pressure) अधिक होता है । यह दबाव अधिक ऊंचे-बड़े मकानों के कारण भी होता है और भूकंप का खतरा बढ़ जाता है । आधुनिक विज्ञान (Modern science) ने भूकंप का एक और कारण (Cause) खोज निकाला है, जिसे प्लेट टेक्टोनिक्स (Plate) कहा जाता है ।

इसके अनुसार भिन्न महाद्वीपों (Continents) और महासागरों (Oceans), पर्वतों (Mountains) तथा मरुभूमियों (Deserts) की अलग-अलग प्लेटें होती हैं, जो निरंतर (Always) खिसकती रहती हैं । उन्हीं प्लेटों के टकराने या अलग होने पर भूकंप आता है ।

भारत में हिमालय के क्षेत्र, पूर्वोत्तर भारत (North-Eastern india) तथा पश्चिम के कुछ क्षेत्रों में अब तक भयंकर भूकंप आ चुके हैं । हाल में ही गुजरात में आये भीषण भूकंप में बड़ी संख्या में लोगों की मौतें हुई थीं । भूकंपों के बाद राहत कार्य (Measures for comfort) चलाये जाते हैं किन्तु इसके आने की सूचना पहले से दिये जाने का कोई तरीका अब तक ज्ञात (Known) नहीं है ।

फिर भी इससे अपनी जान बचाने के लिए लकड़ी के मकानों में रहने और अपने पास मोबाइल फोन, टॉर्च पानी की बोतल और कुछ आवश्यक चीजें हमेशा रखना लाभकारी रहता है । पेड़-पौधे भी भूकंप से हमारी रक्षा करते हैं ।

4. उपसंहार :

भूकंप एक प्राकृतिक आपदा (Natural Calamity) है जिसे रोकना यदि मनुष्य के लिए संभव नहीं है, तो कम-से-कम उससे बचने के लिए आधुनिक विज्ञान (Modern science) की पूरी मदद तो अवश्य ले सकता है ।

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[Disaster Series] Earthquakes and its Management in India

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Among the disasters earthquakes are by far the most unpredictable and destructible. India has seen some of the greatest earthquakes in the last century. The turning of the century brought devastating Bhuj earthquake in 2001. Earthquakes are a prominent danger in India’s disaster profile which has caused huge loss of life and material. Recently, powerful tremors were felt in India following an earthquake of magnitude 6.6 that struck Nepal, killing a few people and destroying many homes.

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This topic of “[Disaster Series] Earthquakes and its Management in India” is important from the perspective of the UPSC IAS Examination , which falls under General Studies Portion.

What are Earthquakes?

  • An earthquake is shaking of the earth caused due to the release of energy from the earth’s interior, which generates waves that travel in all directions.
  • An earthquake can range from minor tremors to large building shanking shock.
  • Minor tremors caused by small vibrations occur every few minutes but great earthquakes happen because of faulting (Normal, reverse and strike-slip) cause a great number of disruptions.

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What are the various types of the earthquake?

  • Tectonic Earthquakes
  • Generated due to sliding of the rocks along the fault plane.
  • This is the most commonly occurring type of earthquake.
  • Volcanic Earthquake
  • Occur due to volcanic activities and displacement caused because of those.
  • These are confined to areas of active volcanoes.
  • Collapse Earthquake
  • These occur in the areas of intense mining.
  • Roofs of underground mines collapse that cause tremors.
  • Explosion Earthquakes

Ground shaking caused by huge explosions like a nuclear explosion and chemical explosion

  • Reservoir induced Earthquakes

These occur in the areas of huge reservoirs like dams.

As can be seen, unlike some other kinds of disaster, the earthquake zones can be demarcated. The earthquake zone mapping helps in planning for mitigating the losses that occurred due to earthquakes.

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India and earthquakes

  • India has had its share in some of the devastating earthquakes.
  • More than 58.6% of the Indian land is prone to moderate to very high-intensity earthquakes.
  • Some of the great earthquakes in India
  • Cutch Earthquake (1819) which was 8.3 magnitude
  • Assam Earthquake (1897)
  • Bihar-Nepal Earthquake (1934) of 8.4 magnitude
  • Koyna Earthquake (1967) of 6.5 magnitude
  • Uttarkashi (1991) of 6.6 magnitude
  • Killari (1993) of 6.4 magnitude
  • Bhuj (2001) of 7.7 magnitude
  • Jammu Kashmir (2005)

What are the reasons for the Earthquakes in India?

  • Himalayan belt – Collision between Indo-Austral plate with Eurasian plate and Burma Plate with Java Sumatra plate. This collision causes lots of strain in underlying rocks’ energy of which is released in the form of earthquakes.
  • Andaman and Nicobar Islands – Seafloor displacement and underwater volcanoes which disturb the equilibrium of earth’s surface
  • Deccan Plateau – some earth scientists have come up with a theory of the emergence of a fault line and energy build-up along the fault line of the river Bhima (Krishna) near Latur and Osmanabad (Maharashtra).
  • Increasing population and unscientific land use in construction make India a high-risk land for earthquakes.

What are the consequences of an earthquake?

Earthquake is characterized by suddenness, scale, and magnitude. These three characters make it extremely dangerous when it comes to life and property without any discrimination. The impacts of the earthquake can be summarized as below

Within the period between 1990 and 2006, around 23,000 lives were lost because of major earthquakes in India.

  • Damage to property

The upheaval caused by an earthquake does huge damage to the property. Especially in a developed area of high population density, the damage to the property is huge.

  • Changes in the river course

One of the important impacts of the earthquake is the change in the river course due to blockage.

Earthquakes when happening in the ocean basin creates huge waves that strike on the coast creating huge damages. The 2004 Tsunami in Sumatra brought Tsunami to the east coast of India.

  • Mud fountains

Due to the huge impact of the earthquake, mud and hot water may emerge on the surface. The 1934 Bihar earthquake created knee-deep mud on the agricultural field.

If the earthquake happens in areas of dams, reservoirs, the damage is multiplied.

The flood may result due to damage caused to the dams.

  • Landslides and Avalanches

Earthquake in hilly and mountain areas may cause landslides and avalanches

  • Fire hazards

Earthquakes cause damage to electric property and gas pipes. Due to the havoc caused by the earthquake, it is even difficult to contain the fire.

Earthquake management in India

Earthquake management in India, Disaster management for that matter, goes through different stages. Some of the critical areas of earthquake management in India are

  • Awareness among various stakeholders
  • Structural mitigation measures
  • Monitoring and enforcement of earthquake-resistant building codes and appropriate town planning.
  • Proper earthquake response planning
  • System of decentralized response
  • Trained manpower to deal with the disaster
  • Building back better

Disaster management action plan can be summarized pictographically in the following way

assignment on earthquake in hindi

Hence first comes the awareness of earthquake-prone areas. Earthquake mapping is an essential component of that awareness regime.

Earthquake mapping in India

Bureau of Indian Standards [IS 1893 (Part I):2002], has divided the country into four seismic zones, Zone-II, III, IV and V. Zone V is the most active region and zone II is the least seismically active region.

Entire northeast India, parts of Jammu and Kashmir, Himachal Pradesh, Uttaranchal, Rann of Kutch in Gujarat, part of North Bihar and Andaman & Nicobar Islands.

Parts of Jammu and Kashmir and Himachal Pradesh, Delhi, Sikkim, parts of Gujarat and small portions of Maharashtra near the west coast, Rajasthan, Northern Parts of Uttar Pradesh, Bihar and West Bengal.

Remaining parts of Uttar Pradesh, Gujarat and West Bengal, Parts of Punjab, Rajasthan, Madhya Pradesh, Bihar, Jharkhand, Chhattisgarh, Kerala, Goa, Lakshadweep islands, Maharashtra, Orissa, Andhra Pradesh, Tamil Nadu, and Karnataka.

  • Zone II covers remaining parts of the country

The earthquake preparedness, rather disaster management, and preparedness was an evolutionary road.

  • The Indian government set up a High-Powered Committee in 1999 and a National Committee after the Gujarat earthquake, to make recommendations on effective preparedness and mitigation mechanisms.
  • The Tenth Five-Year Plan document included a detailed chapter on Disaster Management.
  • The Twelfth Finance Commission was mandated to review the financial arrangements for Disaster Management and preparedness.
  • In December 2005, the Disaster Management Act was enacted

The Disaster management act envisaged the creation of

  • National Disaster Management Authority (NDMA), headed by the Prime Minister

to implement activities of Disaster Management in India

  • State Disaster Management Authorities (SDMAs) headed by respective Chief Ministers to do the same at the state level.
  • Earthquake is an essential part of India’s disaster preparedness challenges.
  • Structure of NDMA

assignment on earthquake in hindi

Some Important measures to prevent and mitigate earthquake loss

  • The National Center for Seismology
  • An office of the Ministry of Earth Sciences. It submits earthquake surveillance and hazard reports to governmental agencies.
  • It includes three divisions: Earthquake Monitoring & Services, Earthquake Hazard & Risk Assessment, Geophysical Observation System.
  • National Earthquake Risk Mitigation Project (NERMP)
  • Strengthening the structural and non-structural dimensions of earthquake mitigation efforts.
  • reducing the vulnerability in the high-risk districts.
  • Necessary risk mitigation measures are put in place in the highly seismic zones.
  • NDMA, tasked with this project has prepared a Detailed Project Report (DPR).
  • National Building Code (NBC)
  • Comprehensive building code and a national instrument providing guidelines for regulating the building construction activities across the country.
  • First published in 1970 at the instance of the Planning Commission and was revised in 1983. Thereafter three major amendments, two in1987 and the third in 1997 were issued.
  • The revised NBC has now been brought out as National Building Code of India 2005 (NBC 2005).
  • The salient features are meeting the challenges posed by natural calamities and incorporating the contemporary applicable international best practices.
  • Building Materials & Technology Promotion Council (BMTPC)
  • undertakes projects for retrofitting of life-line structures to generate awareness among the people and various government agencies.
  • aimed to help people at large and the policymakers in particular in working towards reducing the vulnerability of lakhs of existing public and private buildings.
  • Initiatives by Ministry of Panchayati Raj
  • It releases funds under Backward Regions Grant Fund (BRGF) for meeting critical infrastructural gaps and other developmental requirements.
  • The ministry has financed several district plans under the BRGF for construction of panchayat buildings, Anganwadi centres, school buildings, classrooms, roads, bridges, culverts, etc. and restructuring of State Institutes for Rural Development (SIRD) buildings, block resource centres, panchayat training centers, etc.
  • National Retrofit Program

The NDMA, along with experts from various IITs and requisite ministries, came out with guidelines on ‘seismic retrofitting’.

The National retrofitting Program was launched under the Home Ministry in 2014 following those guidelines.

  • The RBI had asked the banks to deny loans to any building which does not abide by the earthquake resistant structures’ guidelines.
  • The government launched two Mobile apps
  • ‘India Quake’ – Developed by the National center for seismology, the mobile app disseminates real-time earthquake information.
  • ‘Sagar Vani’ -Intended to serve coastal communities, the mobile app disseminates ocean related information and alerts to the user community in a timely manner for their safety.
  • The National Disaster Response Force (NDRF) strives to be the first responder at heritage sites, which are vulnerable to disasters such as earthquakes, floods, cyclones, and tsunami across India.

In Earthquake management scenario in India, The NDMA guidelines of 2007 on earthquake preparedness are very important

According to the guidelines, six pillars of earthquake management are

  • Earthquake resistant construction of new structures.
  • Selective seismic strengthening and retrofitting of existing structures.
  • Regulation and enforcement.
  • Awareness and preparedness.
  • Capacity development.
  • Emergency response.

International cooperation in earthquake preparedness

  • India is a signatory to the Sendai Framework for Disaster Risk Reduction which works in disaster management in a very holistic way.
  • India works closely with the United Nations International Strategy for Disaster Reduction (UNISDR).
  • Shanghai Cooperation Organization Joint Exercise on Urban Earthquake Search and Rescue- ‘SCOJtEx-2019’ was held in New Delhi.
  • The second edition of BIMSTEC Disaster Management Exercise was conducted in Odisha.

Challenges in Earthquake management in India

  • The Earthquake-prone zone mainly is a hilly and mountainous region. Retrofitting is difficult and costly in these regions
  • There is a dearth of trained manpower in earthquake resistant design and building.
  • There is no formal system of competency-based licensing of structural engineers.
  • Safety requirements are not well monitored and enforcement of building codes is lacking.
  • NDMA said that close to 4,000 multi-storied buildings in Ahmedabad won’t survive a high magnitude earthquake due to a faulty design.
  • The mobilization of funds during disasters is still not systemized. The national disaster relief Fund is not publicized enough.
  • Difficulty in response coordination in Uttarakhand floods showcases gaps in disaster response regime.
  • The awareness generation regime is not strong enough. The training of the local population after disaster activities has not been done effectively.

Way forward

  • The NDMA guidelines on earthquake must be implemented in letter and spirit.
  • A special earthquake management department must be created in very high and high-risk seismic zones.
  • The traditional Khasi model of houses must be promoted in the hilly region.
  • Providing tax incentives to people who build earthquake resistance buildings.
  • A single point of contact for various divisions of response for better coordination must be developed.
  • Local population training and capacity building must be done.
  • An effective way to do that would be the empowerment of panchayats and municipal corporations in earthquake management and response.
  • Coordination with other departments such as fire department, Irrigation department to negate any after-effects of earthquakes.
  • The state governments must be supplemented with the fund and technical expertise.
  • Research and development institutes in states like Uttarakhand and other high-risk areas must be set up to localize research and programs.
  • Para diplomacy in Disaster relief can be an effective tool of cooperation for high-risk prone states.

Practice Question for Mains

Better Earthquake preparedness is essential in the development of the Himalayan regions. Comment (200 words)

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